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गद्दार +अधूरा

लाचार देशवासी, मातृभूमि की बेड़ियों का जकड़न, उद्वेलित आंदोलित देशभक्तों का सर्वस्य समर्पण, कदापि फिरंगी ब्रितानी दस्यु का जयकार नहीं होता, विदेशी आक्रांताओं संग अगर कोई गद्दार नहीं होता,

१०१. कविता का स्वरूप @

कविता की बेसिक बातों को कविता का रूप देने का मेरा छोटा प्रयास "कविता का स्वरूप" सभी विद्वानों के विचारों का अंतिम सार, कविता कवि के भावनाओं का उदगार, मुख्य रूप से इनके तीन प्रकार, महाकाव्य, खंडकाव्य, मुक्तक काव्य, कविता के सौंदर्य का भेद है चार, प्रस्तुत योजना, भाव, नाद, विचार, प्रेम, करूणा, क्रोध, हर्ष, उत्साह, मर्मस्पर्शी चित्रण कविता का भाव, काव्य की आत्मा, सृजन भाुकतावश, साहित्य शास्त्रों ने बताया इसी को रस, श्रृंगार, वीर, हास्य, करुण, रौद्र, शांत, भयानक, अद्भुत, विभत्स, रस के नौ अवतार, वात्सल्य और भक्ति रस के अन्य प्रकार, परवर्ती आचार्यों ने किया जिन पर विचार, विचारों की उच्चता में निहित काव्य की गरिमा, कबीर, रहीम, तुलसी, वृंद के दोहे, गिरधर की कुंडलियां, कविता का नाद सौंदर्य, छंदबद्ध रचना, संगीतत्मकता, गेयात्मकता, सरल जिसे पढ़ना, लय, तुक, गति, प्रवाह का समावेश, वर्ण, शब्द का सार्थक समुचित विन्यास, वर्णों की आवृत्ति, नाद का मोहक आकर्षण, करे पाठक को मंत्रमुग्ध, साहित्य का सर्वश्रेष्ठ सृजन, दृश्यों, रूपों, तथ्यों का हृदयग्राही उभार, उपमा, उपमेय, अप्रस्तुत योजना मूल आधार, क...

३०. भीड़तंत्र की निर्दयता से सारा देश डर गया... @

#भीड़_तंत्र_की_निर्दयता_से_सारा_देश_डर_गया... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी कितना अजीब,मांगा खूब रहम का भीख, सामने थे दुष्टों के वंशज, क्रूर दानव पतित, बिना गुनाह तीनों तड़प तड़प कर मर गया, भीड़ तंत्र की निर्दयता से सारा देश डर गया, हिन्दू ह्रदय सम्राट की पावन धरती पालघर, पागल कुत्तों का झुंड थे बिल्कुल बेखौफ निडर, अत्याचार की अनंत गाथा से मानवता सिहर गया, भीड़ तंत्र की निर्दयता से सारा देश डर गया, लाठी डंडों से बुजुर्ग साधु संतो पर निर्मम वार, अनसुनी रह गई उनकी हृदयविदारक चीत्कार, कानून का रखवाला ही इज्जत उसकी हर गया, भीड़ तंत्र की निर्दयता से सारा देश डर गया, आम आदमी के जेहन में सिर्फ एक सवाल, किन पापियों ने किया इंसानियत को कंगाल, क्षत विक्षत शव सबको आतंकित कर गया, भीड़ तंत्र की निर्दयता से सारा देश डर गया, हर भारतीय के दिल से आती सिर्फ एक आवाज, क्रूरता का नंगा खेल खेलने वालों का हो सत्यानाश, उपद्रवियों का उत्पात सोचने को विवश कर गया, भीड़ तंत्र की निर्दयता से सारा देश डर गया

३१. डर @

देखिए, एक परिंदा प्रतिद्वंदी समझकर निगरानी करने वाले ड्रोन पर ही आक्रमण कर बैठा... #डर ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी हमें बहुत डर लगता है, तेरी नादानियों से,  अनवरत अनंत मनमानियों से, अपने अस्तित्व की भीख मांग रहे, मूक असहायों की अनसुनी कहानियों से, असंतुष्ट अतृप्त तेरी कामनाओं से, तरक्की की उन्माद में, मृत दूषित हो चुकी तेरी भावनाओं से, जीवों के अनसुनी चीत्कार हाहाकार से सराबोर, हर्षित होकर नृत्य करने वाले तेरी दुर्भावनाओं से, हमारा आश्रय छीनकर, उन्मुक्त परिंदों को कैद करने वाले मेहरबानियों से, अपना अस्तित्व खो चुके हम जैसों की कुर्बानियों से, सारी सीमाओं को क्षत विक्षत करने वाली, प्रकृति से होने वाले नित्य छेड़खानियों से, जलवायु परिवर्तन से हैरान, जीवन संकट में डालने वाली कठिनाइयों से, विषाणु जनित रोगों के कारण, तिल तिल कर मर रहे मानव जीवन की परेशानियों से, विध्वंस के ढ़ेर पर बैठ, तेरे मन में पनप रहे शैतानियों से, फिर भी मुझे पता है,  मानव तुम्हें डर नहीं लग रहा, मैं खुद डर रहा हूं, तेरी अति महत्वाकांक्षाओं को देख, मेरे मन में उत्पन्न होने वाले हैरानियों से...

११६. मुक्कमल मुकाम *

*मुक्कमल मुकाम* ✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी* बेगानों के भीड़ में खोकर, अपनों की तलाश होती है। तृप्त हो जाए अंतर्मन, बड़ी मुश्किल ऐसी प्यास होती है।। प्यासा होकर भी अक्सर, मुझे सुखद यह अहसास है। मेरा दिल धड़कता जिसके लिए, वो इस जहां में सबसे खास है।। माना बहुत दूर हूं तुमसे, नसीब में नहीं तेरा साथ है। मेरी जिंदगी हो जाती है जन्नत, तेरी यादें भी क्या सुखद अहसास है।। मुस्कुराता हुआ तेरा चेहरा, चांद से भी जिसको जलन है। खुशनसीबी कृष्ण हूं मैं तेरा, राधा जैसा मेरा भी एक सनम है।। ख्वाहिशें होती नहीं सब पूरी। कहानियां रह जाती हैं कुछ अधूरी।। फिर भी किसी के दिल में किसी का नाम होता है। अमर प्रेम कहानियों का शायद यही मुक्कमल मुकाम होता है।।

आत्मचिंतन

आत्मचिंतन ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी आप सुरक्षित हो, सुरक्षित रहो, इसलिए हम ड्यूटी पर तैनात हैं, फिक्र हमारी, नहीं फैले कोरोना महामारी, हमारे लिए क्या दिन और क्या रात है... बेशर्मी से कानून तोड़ने वालों, यह कैसा आपका संस्कार है, अपनों की थोड़ी चिंता करो,  बदनसीबी हम, दूर हमसे हमारा परिवार है, बनो गंभीर, नहीं लगाओ भीड़, जिंदगी सुरक्षित, तभी सुंदर संसार है, हुए संक्रमित, काम आए नहीं कोई प्रीत, कितने होशियार चंद आज लाचार है, नहीं तुम गुलाम, करो मत बदनाम, ख़तरे में आज सारा संसार है, बेमौत मरोगे, बेगुनाहों को भी मारोगे, इसलिए कई मूर्खों ने खाया लाठी का माड़ है, माना हो बिगड़े, फिर भी नहीं सुधरे, चौराहे पर हमें भी तेरा इंतिजार है, कभी सोचना कितना बदनसीब हम हैं, लॉक डाउन में भी हम परिवार से दूर कितना लाचार हैं,

३३. पालनहार का संस्कार @

पालनहार का संस्कार ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी सिक्कों की खनकती आवाज, इसी चाहत में लूट गया बचपन बिंदास, फिर भी समझौता गमों से किया नहीं, लोकतंत्र के आकाओं ने क्या दर्द दिया नहीं ?? रोटियों के लिए रहा मोहताज, किसान का बेटा कैसे उठाऊं आवाज, अन्नदाताओं ने कैसा कष्ट सहा नहीं ? जिसे भी बनाया मालिक, किसानों का अपना रहा नहीं, परिश्रम हमारा परम धर्म, फल की चिंता नहीं, करता हूं अपना कर्म, लाख चुनौतियों में भी डरा नहीं, कैसे कह दूं, अपनों का पेट भरा नहीं ? आत्मा करती है विद्रोह, हमारी उपज का उचित मूल्य दो, बिचोलियों ने कौन सा जुल्म किया नहीं ? हमारे अरमानों की हत्या से किसी को फर्क पड़ता नहीं, दर दर पर खाता हूं फटकार, ऐसे जीवन को धिक्कार, बिना दलालों के बैंकों ने ऋण दिया नहीं, हमारी आत्महत्याओं से भी किसी का दिल पसीजा नहीं, प्रजातंत्र के आका हो जाते अन्तर्ध्यान, सत्ता की शक्ति, वेतन भत्ता का भी गुमान, हमारी फटेहाली में कोई साथ रहा नहीं, मेरी लाश उठ गई लेकिन मैं रिटायर हुआ नहीं, उद्योगतियों का है खुमार, उसके राहत को धन अपार, किसी ने आत्महत्या किया नहीं, आश्चर्य किसी नेता का काला धन मिला नही...

३२. करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण @

करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी कर रहे तर्पण, श्रद्धा सुमन अर्पण, प्रज्वलित दीपमालाओं का समर्पण, अपने भक्तों का स्वीकार करो निवेदन, करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण, आपके भक्तों की परीक्षा कठिनतम, है पूर्ण विश्वास, होंगे लज्जित ना हम, इसी आस में कर रहे दीपों का अर्पण, करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण, विपदा बड़ी, विचलित है सबका मन, आप पर आश्रित और कहां जाएं हम, आपका दिया विवेक, आपसे ही जीवन, करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण, है पूर्ण विश्वास, समाप्त होगा यह तम, आप जल्द करेंगे प्रकाशपुंज का सृजन, हम दरिद्रों ने किया है प्रयास अधिकतम, करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण, हमारे पालनहार, आप सृष्टि में श्रेष्ठतम, दीपों की श्रृंखला से भक्त करें आह्वान, करो कृपा हो शैतानी ताकतों का उन्मूलन, करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण स्वीकार करो प्रभु हमारा अभिवादन, चलाओ सुदर्शन, रुक जाए चीरहरण, संकट में अस्तित्व,आपके शरणागत हम, करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण, घनघोर अंधकार का तोड़ने घमंड, हम मानव करें दीपों का प्रज्वलन, अपनी दिव्य ज्योति से मिटा दो आतंक, करो प्रभ...

३६. झमेला @

#झमेला ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी लेकर आए, मेरे लिए लाख दुवाएं, फिर भी दिल ने मुझको रोका है, कर परख कर स्वीकार दुवाएं, दरिया दिल दिखावा, अंदर धोखा ही धोखा है, रजनी की भयावह कालीमा से क्यों भयभीत, इसकी सादगी दुर्लभ, सरलता अनोखा है, चकाचौंध रोशनी करती भले आकर्षित, कलंक अदृश्य, श्रृंगार बहुत ही मैला है, डगर कठिन, मगर है मुमकिन, आत्मविश्वास तेरा क्यों डोला है, पथ सुगम बताता है दुर्जन, बिना तर्क बनता क्यों भोला है, मित्रों के भीड़ में मत बन भेड़, यह भेड़ियों का टोला है, अपेक्षाएं रख अपनी सीमित, परिस्थितियों ने मित्रों को तौला है, आए जो काम, कठिनता तमाम, होने देते नहीं तुम्हें अकेला है, रखो इनका ख्याल, हो चाहे कितना बबाल, यही अपने तुम्हारे, बांकि झमेला है...

३४. कलमकार की ख्वाहिश @

कलमकार की ख्वाहिश ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी नहीं आह की कोई चिंता, नहीं वाह की है ख्वाहिश, निष्पाप मां करूं तेरी साधना, मेरे मस्तिष्क को रखना पवित्र... विवेक रखना मेरा शुद्ध, साहस से करना नहीं वंचित, मानवीय पीड़ाओं का मैं, वर्णन कर सकूं बेबाक सचित्र... शब्द मेरे हो इतने अनमोल, छलियों को करे अचंभित, वेदनाओं का करूं ऐसा वर्णन, पल में पत्थर हो जाये द्रवित, माया की तराजू तोले नहीं, बदले कभी नहीं मेरा चरित्र, कलम बंधन में बंधे सके, मुझे बनाना नहीं इतना दरिद्र, निश्चिंत रहूं मैं इतना, निर्बल का कर सकूं जिक्र, हक की लड़ाई का हो मामला, किसी तीस मार खां का ना करूं फिक्र, मजबूर कर सके कोई नहीं, लालसाएं हो इतना सीमित, गलतियां ख़ुद की स्वीकार करूं, मेरे दिल को रखना पवित्र... कपटियों का भय कम नहीं हो, विचारधारा हो नहीं मेरा दूषित, मेहरबानी तेरी मुझपर इतनी रहे, नई रचना तेरे चरणों में करता रहूं अर्पित,

६६. ले लो बाबा साईं का नाम... @

ले लो बाबा साईं का नाम, ले लो बाबा साईं का नाम अरे हम भी परेशान,  तुम भी परेशान, होगा सबका निश्चित समाधान, ले लो बाबा साईं का नाम, ले लो बाबा साईं का नाम गरीब होगा धनवान, कमजोर बनेगा बलवान, मूर्ख भी एक दिन पायेगा ज्ञान, ले लो बाबा साईं का नाम, ले लो बाबा साईं का नाम... चोर हो या बेईमान, दुर्जन हो या शैतान, करेंगे सबका वही हिसाब तमाम, ले लो बाबा साईं का नाम, ले लो बाबा साईं का नाम, परेशान  पहलवान, संकट में खुलती नहीं जुबान, सबका रखेंगे वही मान, ले लो बाबा साईं का नाम, ले लो बाबा साईं का नाम भैया अमीर भी परेशान, धन की लड़ाई का घमासान, रखो विश्वास होगा सबका कल्याण, ले लो बाबा साईं का नाम, ले लो बाबा साईं का जन्म, रोगी को मिले प्राण, डाक्टर भी हैरान, सारे रोगों का करता वही निदान, ले लो बाबा साईं का नाम, ले लो बाबा साईं का नाम, संकट में हो प्राण, या निकलती नहीं जान, जुबां पर आता एक ही नाम, ले लो बाबा साईं का नाम, ले लो बाबा साईं का नाम, भीड़ हो या सुनसान, बारात हो या श्मशान, सब बिगड़ी बनावे वही महान, ले लो बाबा साईं का नाम, ले लो बाबा साईं का नाम... हम भी अनजान,  भ...

३५. ले लो राम का नाम @

ले लो राम का नाम ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी ले लो राम का नाम, ले लो राम का नाम, अरे हम भी परेशान,  तुम भी परेशान, होगा सबका निश्चित समाधान, ले लो राम का नाम, ले लो राम का नाम गरीब होगा धनवान, कमजोर बनेगा बलवान, मूर्ख भी एक दिन पायेगा ज्ञान, ले लो राम का नाम, ले लो राम का नाम... चोर हो या बेईमान, दुर्जन हो या शैतान, करेंगे सबका वही हिसाब तमाम, ले लो राम का नाम, ले लो राम का नाम, परेशान  पहलवान, संकट में खुलती नहीं जुबान, सबका रखेंगे वही मान, ले लो राम का नाम, ले लो राम का नाम भैया अमीर भी परेशान, धन की लड़ाई का घमासान, रखो विश्वास होगा सबका कल्याण, ले लो राम का नाम, ले लो राम का जन्म, रोगी को मिले प्राण, डाक्टर भी हैरान, सारे रोगों का करता वही निदान, ले लो राम का नाम, ले लो राम का नाम, संकट में हो प्राण, या निकलती नहीं जान, जुबां पर आता एक ही नाम, ले लो राम का नाम, ले लो राम का नाम, भीड़ हो या सुनसान, बारात हो या श्मशान, सब बिगड़ी बनावे वही महान, ले लो राम का नाम, ले लो राम का नाम... हम भी अनजान,  भाई तुम भी अनजान, किस रूप में वो आये करने समाधान, ले लो राम का नाम, ले लो राम का ...