सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

३२. करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण @

करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

कर रहे तर्पण, श्रद्धा सुमन अर्पण,
प्रज्वलित दीपमालाओं का समर्पण,
अपने भक्तों का स्वीकार करो निवेदन,
करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण,

आपके भक्तों की परीक्षा कठिनतम,
है पूर्ण विश्वास, होंगे लज्जित ना हम,
इसी आस में कर रहे दीपों का अर्पण,
करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण,

विपदा बड़ी, विचलित है सबका मन,
आप पर आश्रित और कहां जाएं हम,
आपका दिया विवेक, आपसे ही जीवन,
करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण,

है पूर्ण विश्वास, समाप्त होगा यह तम,
आप जल्द करेंगे प्रकाशपुंज का सृजन,
हम दरिद्रों ने किया है प्रयास अधिकतम,
करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण,

हमारे पालनहार, आप सृष्टि में श्रेष्ठतम,
दीपों की श्रृंखला से भक्त करें आह्वान,
करो कृपा हो शैतानी ताकतों का उन्मूलन,
करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण

स्वीकार करो प्रभु हमारा अभिवादन,
चलाओ सुदर्शन, रुक जाए चीरहरण,
संकट में अस्तित्व,आपके शरणागत हम,
करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण,

घनघोर अंधकार का तोड़ने घमंड,
हम मानव करें दीपों का प्रज्वलन,
अपनी दिव्य ज्योति से मिटा दो आतंक,
करो प्रभु अपने संतानों का संरक्षण,

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पिता का छत्रछाया

पिता का छाया  (कहानी) ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी एक लड़की के जन्म लेते हीं सबसे ज्यादा ज़िम्मेदारी का भार एक पिता के ऊपर हीं आ जाता है। समय कितना भी बदल गया हो लेकिन एक लड़की की जिंदगी का भविष्य आज भी सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि उसके पिता की क्या हैसियत है और उसका पिता अपनी लड़की के सुरक्षित और उज्जवल भविष्य के लिये कितना धन खर्च करने की इच्छा रखता है। सबसे बड़ा दुर्भाग्य तो उस लड़की का होता है जिसके सिर पर पिता का छत्रछाया हीं नहीं हो। सुगंधा एक पढ़ी लिखी और समझदार लड़की है। भगवान ने भले हीं उसे बहुत सुंदर काया नहीं दिया हो लेकिन थोड़े छोटे कद की वह एक आकर्षक महिला है। दिल उसका बिल्कुल निश्छल और उम्र के हिसाब से थोड़ा बच्चा है। अपने आस-पास के लोगों का ख्याल रखना और दूसरे के गम से तुरंत गमगीन हो जाना उसके स्वभाव की सबसे बड़ी खासियत है। किसी पर भी भरोसा कर लेना और घर आने-जाने वाले लोगों की खातिरदारी में तुरंत तल्लीन हो जाना उसे सभी के बीच लोकप्रिय बनाता है। इन सबके बीच एक कसक जो उसे अंदर हीं अंदर सालती है वह है उसकी अपनों से उन उम्मीदों का पहाड़ जो एक बिना बाप के लड़की की शायद हीं पूरी होती...

४०. ऐसी ममता को नित्य नमन (निभा पत्रिका) @

ऐसी ममता को नित्य नमन ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी माँ के ममता की छाँव है अनमोल,  इससे बढ़कर नहीं कोई स्वर्ग और भवन,  तेरे आशीषपूर्ण स्पर्श से हर जाए सारे दुःख,  ऐसी ममता क़ो नित्य नमन .... इनके कठिन संघर्ष का मुश्किल वर्णन,  इनके त्याग का कठिन विवरण,  संतान की ख़ुशी के लिये सर्वस्व त्याग दे,  ऐसी ममता क़ो नित्य नमन ... धड़कन की आवाज भी जिनकी देन है, जिसने इस सुंदर संसार में क्या हमारा सृजन,  जिनके दूध का कर्जदार शरीर का कण-कण, ऐसी ममता को नित्य नमन ... ऊंचाई चाहे जितनी कर ले हम हासिल,  छू ले क्यों ना चाहे हम गगन,  जिनकी गोद में खेला हमारा बचपन,  ऐसी ममता को नित्य नमन ... हमारी छोटी सफलता से पुलकित जिसका मन,  सबसे ज्यादा हमारी सफलता से मनाता हो जश्न,  कर्जदार उसका यह शरीर और यौवन,  ऐसी ममता को नित्य नमन ... इस सृष्टि में अगर हो जाएं हम दफन,  मेरी मौत से पहले, ख़ुद के लिये मांगे कफ़न,  अपने कलेजे के टुकड़े के लिये करे सर्वस्व अर्पण,  ऐसी ममता को नित्य नमन ...