सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

सफलता लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

४४. सफलता का बहाना @

सफलता का बहाना ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी लोगों के तानों से तंग इन्हीं तानों से तना, बुनता रहा मैं जिंदगी का ताना बाना, नहीं मेरी परेशानियां खत्म हुई और नहीं ताना, हकीकत मेरे हिस्से आई और जमाने का हो गया अफसाना ... इन तानों के चटकारे में हकीकत बना अफसाना, सबको पहचान कर भी बनना पड़ा मुझे अनजाना, मेरा हौंसला देख फ़िर भी हैरत में है ज़माना, तेरी इसी हैरानी को देख खुश है यह संघर्ष का दीवाना... सलाम तेरे हुनर को सलामत रहे तेरा ताना, जख्मों पर नमक छिड़कने में अव्वल तुं हो जाना, ऊपर वाले मुझ पर सिर्फ इतनी रहमत तुम फरमाना, कठिन हालातों में भी विचलित न कर सके मुझे कोई ताना... मेरी मजबूरियों का मज़ाक सोच समझकर बनाना, कोई मजबूर ऐसा नहीं जिसे ताना मारती नहीं ज़माना, इन ताने मारने वालों के बस में नहीं कोई जिंदगी सजाना, और हम जैसे पागल बनाते हैं इसे सफलता का बहाना,

७२. ऐसे हीं कर्मवीर को सफ़लता मिलता है ... १

ऐसे कर्मवीर को हीं सफ़लता मिलता है ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी पथ के पथिक लक्ष्य की तलाश में, कर्मभूमि पर सफ़लता की प्यास में, जीवनपथ के कठिन राह पर निरंतर चलता है, ऐसे हीं कर्मवीर को सफलता मिलता है ... जिद्द के जुनून, संघर्ष की आग में, हालात के विघ्न, प्रतिस्पर्द्धा के संसार में, हर पल तूफ़ान में दीपक की तरह जलता है, ऐसे हीं कर्मवीर को सफ़लता मिलता है ... चुनौतियों के समंदर, बाधाओं की रार में, असफ़लता के भी भयावह घनघोर अंधकार में, अपने पथ से तनिक नहीं टलता है , ऐसे हीं कर्मवीर को सफ़लता मिलता है ... कर्तव्यों के बोझ, षड्यंत्र के व्यापार में, कलुषित राजनीती व भ्रष्टाचार के बाज़ार में, अपने ईश्वर पर अडिग भरोसा करता है, ऐसे हीं कर्मवीर को सफ़लता मिलता है ... सूर्य की तपिश, आमवश्या की अँधेरी रात में, ज्वालामुखी के विध्वंस, सुनामी के हाहाकार में, अपने आत्मबल को फ़िर भी स्थिर रखता है, ऐसे हीं कर्मवीर को सफलता मिलता है ... दुर्जन की दुष्टता, सज्जन के प्रभाव में, सहयोग और साधन के बिल्कुल अभाव में, जुगनू की तरह अँधेरे से निरंतर लड़ता है, ऐसे हीं कर्मवीर को सफ़लता मिलता है ... ...