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४१. संघर्ष @

संघर्ष ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी झूठ की बुनियाद पर, इंसान चतुर बन सकता है, सत्य का पथरीला डगर पर, जीवन मधुर बन सकता है, मुंह पर जवाब नहीं पाकर, खुद को हम शेर समझते हैं, मजबूरियों से दबे इंसानों को, बलि का सुलभ भेड़ समझते हैं, परेशानियों से मुक्ति का एक ही रास्ता, परिणाम से बेफिक्र कर्म से वास्ता, लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में कोई अवरोध नहीं, अपने कर्तव्यों के निर्वहन से जिन्हें कोई क्षोभ नहीं... वक्त जब- जब अंगड़ाई लेती है, चतुराई का पहाड़ मिनटों में ढहती है, पाप के घड़े का फूटना तय है, संघर्षशील की दुनिया करती जय है...