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५७. शक्की बीबी @

शक्की बीबी (हास्य कविता) ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी बीमारी का बहाना बनाकर, अपने कुछ नखरे दिखाकर, मेरे संडे को ख़राब करने की उसने ठानी थी, बड़ी अजीब उसकी मनमानी थी... कूलर से गर्म हवा आ रही थी, गर्मी से ज्यादा बीवी का डर सता रही थी, कर्म फुट गये इस निठल्ले को पाकर, ऐसा हीं पड़ोसन को बता रही थी, आते हीं सिर पर चढ़ कर बोली, तुमसे खाना भी ठीक से बनता नहीं, झाड़ू-पोंछे के लिये मौजूद है नौकरानी, कपड़े अब तक क्यों धोये नहीं, कूलर में कब  भरागे  पानी ... बंदा मैं भी हाजिर जवाब था, नौकरानी का कर रहा हिसाब था, मालिक बनने की मेरी कोई ख्वाजाईश नहीं, मैं तुम्हारी हीं नौकरानी के पास था... बीवी का माथा हुअा गर्म, आती नहीं है तुमको शर्म, तनख्वाह मैंने कब कर दिया भुगतान, ख़ूबसूरत बीवी के रहते करते हो ऐसा काम... आज मैंने भी मौका पाया था, गाय समझ कर साड़ पाया था, कभी कहती हो करने को काम, कभी लगती हो लगाने इल्जाम, मैं तेरे झांसे नहीं आने वाला हूँ, काम के डर से नहीं भागने वाला हूँ, तुमसे भली यह नौकरानी है, कूलर में उसने भर दिया पानी है, जाओ जा कर करो आराम, मुझे करने दो नौकरान...

५६. पहला प्रेम पत्र @

  पहला प्रेम पत्र   (हास्य कविता ) ✍ बिपिन कुमार चौधरी मैंने उसे आज एक  ख़त  लिखा है, दिल का इजहारे मोहब्बत लिखा है, यादों से कभी रुखसत नहीं होती हो, जिंदगी से रहता हूँ बेख़बर हरवक्त लिखा है, मैंने आज एक प्रेम पत्र लिखा है .... उसने भी मुझे प्यार से ख़त लिखा है, पहली लाईन में हीं कमबख्त लिखा है, तरस मुझ पर उसे बहुत आया है, अपनी सेंडील को बड़ा सख़्त लिखा है, कभी हुअा अगर तेरा मेरा सामना, प्यार का भूत मिनटों में उतर जायेगा, ख़ुद को उसने चंडी का भक्त लिखा है... उसने भी प्यार से मुझे ख़त लिखा है... पहला ख़त हीं मेरे इश्क़ का दफ़न कब्र निकला है, जवाब देने का अब तक नहीं मुझे  फुरसत मिला है, भरी बाज़ार में मुझसे हीं टकराने का उसे वक्त मिला है, सेंडील से पहले उसकी जुबां सख़्त निकला है, ई मेल के जमाने में गदहे तूने ख़त लिखा है, सिर्फ 399 के रिचार्ज पर बदल जायेगी तेरी क़िस्मत, ऐसा प्यारा मुझे मोहब्बत मिला है ... मैंने आज एक प्रेम पत्र लिखा है ...