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जुलाई, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हुनरबाज़

*हुनरबाज* ✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी* हमारे मुल्क़ में हुनरबाजों की कोई कमी नहीं है, जुबां खोलने की गुस्ताखी कोई दिल्लगी नहीं है, आबरू खो कर वह न्याय को दरदर भटकती रही, इंसाफ के दरख...

४८. हम भक्तों का बाबा तू हीं सहारा है @

हम भक्तों का बाबा तू हीं सहारा है ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी पथ कठिन, कांवरियों क़ी भीड़ कहाँ हारा है, बाबा भोला को सब भक्तों ने पुकारा है, चारों ओर बोल बम का गूंजता नारा है, हम भक्तों का बाबा सिर्फ़ तू हीं सहारा है.. सावन का महीना, बारिश का मौसम, बाबा क़ी नगरी पहुँच झूमता है मन, बीच भंवर से निकाल करता किनारा है, हम भक्तों का बाबा तू हीं सहारा है ... ना कोई बड़ा, ना कोई यहाँ छोटा है, तेरे दर आनेवाले के मन तू हीं बैठा है, हर बिगड़ी को बाबा तूने हीं संवारा है, हम भक्तों का बाबा तू हीं सहारा है... महिला-पुरुष हो या बच्चे जवान, बोल बम का नारा करता सब समाधान, तेरी महिमा बाबा सबसे न्यारा है, हम भक्तों का बाबा तू हीं सहारा है ... भंगेड़ि गंजेड़ि भी तेरी भक्ति में झूमता है, सबके दिल क़ी एक तू हीं सुनता है, इतना दयालु बाबा भोला हमारा है, हम भक्तों का बाबा तू हीं सहारा है ... तेरी सरलता का मैं क्या करूं बखान, बैजू महामण्डित तोड़ा रावण  का गुमान, इसलिय तू भक्तों को सबसे प्यारा है, हम भक्तों का बाबा तू हीं सहारा है ...

४९. जाहिल @

जाहिल ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी महफ़िल में तीन लोग थे,  मैं, मेरी ख़ुशी औऱ मेरी जिंदगी,  जिंदगी को झुक कर आदाब क्या  किया,  ख़ुशी बिल्कुल रूठ गयी है,  ग़म को जबसे अपनी जिंदगी बनाया है,  बहुतों से दोस्ताना टूट गयी है,  इन टूटे दोस्ताने से मैं फ़िर भी बेख़बर हूँ,  सच्चे दोस्तों से रू ब रू हुई मेरी जिंदगी है ... भीड़ में थोड़ा तन्हा जरूर हूँ,  फ़िर भी सुकून महसूस होता है,  ख़ुशी अपने साथ भीड़ लेकर आयी थी,  ग़म ने उनका तासीर बताया है,  ख़ुद को बहुत होशियार समझता था, मेरे जिंदगी ने मुझे कितना जाहिल बताया है...

५०. मुसाफ़िर @

मुसाफ़िर ढूंढ़ते हैं तो किनारा मिल हीं जाता है, मुसीबत हो चाहे कितनी बड़ी, रब का इशारा मिल हीं जाता है ... कृपा अगर उनकी हो, बीच मझधार से भी आदमी निकल जाता है, इशारे समझना जो नहीं चाहते, किनारे पर भी वह डूब जाता है ... Copyright @ बिपिन चौधरी

५१. समाधान @

शब्दों के बहुत मायने होते हैं, सवांद अदायगी रिश्तों के आईने होते हैं, बातें संसद औऱ अदालत में भी बहुत होती है, आधा कुतर्क आधे स्वार्थ-सिद्धि के अफ़साने होते हैं .... हक़ीक़त अत्...