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४६. ज्यादती @

४६. ज्यादती @ ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी हमदर्द बन कर आए वो, जिन्हें हमारे दर्द का पता नहीं था, कितने नासमझ बनते हैं ये लोग, जिन्होंने हमें यह दर्द दिया था ... तेरी गुस्ताखी कुछ ख़ास नहीं है, मैं हीं कुछ ज्यादा समझदार हूँ, भरोसा हर किसी पर करना मुनासिब नहीं, बिना दक्षिणा इस ज्ञान को देने का कर्जदार हूँ ... मेरे यक़ीन का महल राख हुआ है, बेशक बहुत बड़ा विश्वासघात हुआ है, फ़िर भी ख़ुश हूँ क्योंकि तेरी अदा गजबनाक है, खंजर भौंक कंधे पर हाथ रखना अब नहीं शर्मनाक है... गिरगिट भी शर्म से पानी-पानी हुआ, भीड़ में जब तूने रब से मेरे लिये मांगा दुआ, इतना बेहयापन तूने कहाँ से पाया है, सबकुछ निगल कर ख़ुद को भूखा बताया है... सत्ताधारी ना जाने क्यों भूल गये हैं, कितने सल्तनत धूल में मिल गये हैं, जनता इन कष्टों को झेलने की आदि है, तेरा इस कदर हमदर्द बनना सबसे बड़ी ज्यादती है ...

५८. चुनावी भिखारी @

*चुनावी भिखारी* ✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी* आज दर पर एक पुराना भिखारी आया था, मक्के की रोटी संग सरसों का साग खाया था, इन्द्रा आवास संग वृद्धापेंशन का कभी सपना दिखाया था, चुनावी बयार ने पाँच वर्ष बाद उसे  भिखारी बनाया था .... काकी के चरणों पर लोट-पोट शरमाया था, कैंची सी जुबां वाली काकी को देख घबराया था, चरणों से उठा काकी ने खाट पर बिठाया था, चुनावी बयार ने पांच वर्ष बाद उसे भिखारी बनाया था, कमबख्त के चेहरे को देख बेटा तूफ़ान था, सरकारी दफ़्तरों में ठोकर खा-खा कर परेशान था, बदसलूकी ना कर भिखारियों से काकी ने समझाया था, चुनावी बयार ने पांच वर्ष बाद भिखारी बनाया था ... भोजन संग आशीर्वाद पाकर भिखारी गदगद था, संस्कारों के बंधन में काकी ने दबाया नफ़रत था, बेशर्मों के बादशाह ने ख़ुद को महान बताया था, चुनावी बयार ने पांच वर्ष बाद उसे भिखारी बनाया था ... सामने खड़ी एक पगली थी, कालिख पोत भिखारी संग मनाई होली थी, बात बड़ी नहीं भिखारी ने बाथरूम आलीशान बनवाया था, चुनावी बयार ने पांच वर्ष बाद उसे भिखारी बनाया था ... शरीफों की बस्ती में एक पागल ने कुछ ऐसा कर दिया, क़लम के सिपाहियों...

कुछ लोग पैदा लेते हीं पार्टी के भगवान हो गये हैं ...

*कुछ लोग पैदा लेते हीं पार्टी के भगवान हो गये हैं ...* कुछ गदहे पहलवान हो गये हैं, पतलून पहनते हीं जवान हो गये हैं, बालों को सफ़ेद करवाने वाले आश्रित इनके हैं, कुछ लोग पैदा लेते हीं...

कुछ लोग पैदा लेते हीं पार्टी के भगवान हो गये हैं ...

*कुछ लोग पैदा लेते हीं पार्टी के भगवान हो गये हैं ...* कुछ गदहे पहलवान हो गये हैं, पतलून पहनते हीं जवान हो गये हैं, बालों को सफ़ेद करवाने वाले आश्रित इनके हैं, कुछ लोग पैदा लेते हीं...

शिक्षक बंधु को यूं मूर्ख नहीं बनाओ ...

शिक्षक बंधु को यूं मूर्ख नहीं बनाओ ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी संघ-संघ का गीत हम सबने बहुत गाया, सत्ता और स्याह कोट ने इसी का फायदा उठाया ... सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई को किसी ने नह...

७४. फ़िर कोई जे.पी. आने वाला है ... @

फ़िर कोई जे.पी. आने वाला है ... ✍ बिपिन कुमार चौधरी एक स्वराज का आँधी आया था, फ़िरंगी ताकत को जड़ से मिटाया था, शोषण और दमन के स्याह का पटाक्षेप करने, भारत माँ के सपूतों ने ख़ून की नदियाँ बहाया था ... बच्चे-बूढ़े, मजदूर-किसान, मातृशक्ति हो या ग़रीब घर का नौजवान, सबकी आँखे चमक उठी थी, लोकतंत्र के मठाधीश करेंगे सब समाधान... उषा की इस नई बेला में, नेतागीरी की इस झमेला में, हिंदु-मुस्लिम, मंदिर मस्जि़द पर देश हमारा अटका है, अमर शहीद स्वर्ग में सोच रहे लोकतंत्र कहाँ ये भटका है ... भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का बोलबाला है, जमीन से जुड़ी जनता का नहीं यहाँ कोई सुनने वाला है, लोकतंत्र के मठाधीशो ने न्याय के पर को भी क़तर डाला है, आम आदमी आज भी निर्बल,  सिस्टम गड़बड़झाला है ... विकास का दिवास्वप्न दिखाने वाले, ख़ुद को जनता का मसीहा बताने वाले, जुबां शहद सा मीठा और दिल तुम्हारा क़ाला है, तेरे कुकर्मों का हिसाब करने, फ़िर कोई जे.पी. आने वाला है ...