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मार्च, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

८५. आज का विकास @

आज का विकास ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी जिंदगी की जद्दोजहद और ये लालची मन, सबकुछ यहाँ बिकने लगा है, बच्चों के मुंह से नेवाले छीन गये, बिन मुनाफ़े नहीं बिकते अब कफ़न  .... न्याय भी बिकने लगा है, इलाज़ की भी बोली लगती है, मेधा पैरवी और डोनेशन की बंधक हुई, सत्य और ईमानदारी हो चुका है दफ़न ... कुछ लोग चुनौतियों से लड़ रहे हैं, कुछ अपनों से लड़ रहे हैं, अधिकांश अपनी परेशानी से यहाँ परेशान नहीं हैं, दूसरों की तरक्की देख कर मर रहे हैं...., किसान निराश है, युवा उदास है, बहनों के हाथों की मेहंदी, दहेज की दास है, बच्चों की मुस्कुराहट, किताबों के बोझ से सहमा है, इंसानियत रो रही है, ये आज का विकास है।

बेवफ़ा

बेवफ़ा ... किताबों में अक्सर जिनकी सूरत दिख जाती है, कानों में जिसके चहकने की आवाज गुनगुनाती है, सपनों में वो अपने गुनाहों का हिसाब मांगती है, वक्त भी जिन यादों को भुला नहीं पाय...

नेतागीरी स्टाइल

कटिहार के शख़्सियत

" कटिहार   के शख़्सियत " पुस्तक लिखने में सहयोग की अपील कटिहार जक्शन की सुंदरता और व्यवस्था इसे बिहार में एक ख़ास पहचान देती है। ऐसे तो कटिहार बहुत छोटा शहर है लेकिन *यहाँ के ग्रामीण परिवेश से कई  राजनीतिज्ञ, शिक्षा और साहित्य के महारथी, व्यापार के शहंशाह, समाजसेवी, डाक्टर और रंगकर्मी और प्रसाशनिक पदाधिकारियों आदि ने सफ़लता के उच्च कोटि का मुकाम स्थापित किया है। कितना अजीब लगता है ना पूरी दुनियाँ के बारे में सोशल मीडिया पर लंबी बहस में मशगूल कटिहारवासी अपने हीं धरती के योद्धाओं के संघर्ष और सफ़लता की अनोखी मिशाल से काफी अनजान हैं। कटिहार की विरासत और शख़्सियत की तलाश अपने मिट्टी की उस सुनहरे खुशबू की तलाश है, जिसने यदा-कदा हमें गौरवान्वित होने का सुनहरा अवसर प्रदान किया।* जिंदगी की खूबसूरती संघर्ष से प्राप्त होने वाली उस अद्भुत परिणाम में है, जिससे मानवजाति चुनौतियों को ठेंगा दिखा कर बोलती है, हम दुनियाँ के सबसे विवेकशील और कर्मशील प्राणी हैं जिसे हर प्रकार की चुनौतियों का सामना कर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में महारत हासिल है। मैं कटिहार के ऐसे हीं महारथियों की तला...

कटिहार के शख़्सियत

" कटिहार के शख़्सियत " पुस्तक लिखने में सहयोग की अपील कटिहार जक्शन की सुंदरता और व्यवस्था इसे बिहार में एक ख़ास पहचान देती है। ऐसे तो कटिहार बहुत छोटा शहर है लेकिन *यहाँ के ग्रामीण परिवेश से कई  राजनीतिज्ञ, शिक्षा और साहित्य के महारथी, व्यापार के शहंशाह, समाजसेवी, डाक्टर और रंगकर्मी और प्रसाशनिक पदाधिकारियों आदि ने सफ़लता के उच्च कोटि का मुकाम स्थापित किया है। कितना अजीब लगता है ना पूरी दुनियाँ के बारे में सोशल मीडिया पर लंबी बहस में मशगूल कटिहारवासी अपने हीं धरती के योद्धाओं के संघर्ष और सफ़लता की अनोखी मिशाल से काफी अनजान हैं। कटिहार की विरासत और शख़्सियत की तलाश अपने मिट्टी की उस सुनहरे खुशबू की तलाश है, जिसने यदा-कदा हमें गौरवान्वित होने का सुनहरा अवसर प्रदान किया।* जिंदगी की खूबसूरती संघर्ष से प्राप्त होने वाली उस अद्भुत परिणाम में है, जिससे मानवजाति चुनौतियों को ठेंगा दिखा कर बोलती है, हम दुनियाँ के सबसे विवेकशील और कर्मशील प्राणी हैं जिसे हर प्रकार की चुनौतियों का सामना कर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में महारत हासिल है। मैं कटिहार के ऐसे हीं महारथियों की तलाश में अप...

८१. दिमाग का अंधा @

दिमाग का अंधा ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी बेवजह भौंकना कुछलोगों की  फ़ितरत होती है,  जाबांज के हौसले तोड़ देना, कुछ किये बिना हीं श्रेय लेना, मजलिस में खुद को बलिदानी साबित करना, पल पल षडयंत्र का जाल बुनना, उस जाल में फंस कर बेमौत मरना, ऐसे नाचीज की शहादत होती है, अरे जिगर जिनका बड़ा होता है, सपने उनके पूरे भी होते हैं, ऐसे भौंकने वालों का भला क्या असर, जिनके दिल में अंगारों के जलजले होते हैं, परीक्षा उनकी कठिन होती है, हर पल इम्तिहान जटिल होती है, खामोशी को उनकी बुजदिली ना समझें,  लक्ष्य पर उनकी निगाहें बड़ी संगीन होती है, आप रोक सकते हो उन्हें, तोड़ नहीं सकते, दिल भले इनका कमजोर होता है, दया और सहयोग का सैलाब भरा होता है, वक्त आने पर ये जवाब देते हैं, हर ज़ख्म का माक़ूल हिसाब लेते हैं, अगर तबाही खुद की रोकना हो, इनके क्रोधाग्नि से डरो, ये शांत हैं तो क्या हुआ, इनकी विध्वंसक खामोशी से डरो, लक्ष्य इनके लिये कोई बड़ा नहीं होता, बाधा इनके सामने ज्यादा दिन खड़ा नहीं होता, धृतराष्ट्र अगर सिर्फ आँख से अंधा होता, तो सारा खानदान बेमौत मरा नहीं होता ....