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३१. डर @

देखिए, एक परिंदा प्रतिद्वंदी समझकर निगरानी करने वाले ड्रोन पर ही आक्रमण कर बैठा...

#डर

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

हमें बहुत डर लगता है,
तेरी नादानियों से, 
अनवरत अनंत मनमानियों से,
अपने अस्तित्व की भीख मांग रहे,
मूक असहायों की अनसुनी कहानियों से,
असंतुष्ट अतृप्त तेरी कामनाओं से,
तरक्की की उन्माद में,
मृत दूषित हो चुकी तेरी भावनाओं से,
जीवों के अनसुनी चीत्कार हाहाकार से सराबोर,
हर्षित होकर नृत्य करने वाले तेरी दुर्भावनाओं से,
हमारा आश्रय छीनकर,
उन्मुक्त परिंदों को कैद करने वाले मेहरबानियों से,
अपना अस्तित्व खो चुके हम जैसों की कुर्बानियों से,
सारी सीमाओं को क्षत विक्षत करने वाली,
प्रकृति से होने वाले नित्य छेड़खानियों से,
जलवायु परिवर्तन से हैरान,
जीवन संकट में डालने वाली कठिनाइयों से,
विषाणु जनित रोगों के कारण,
तिल तिल कर मर रहे मानव जीवन की परेशानियों से,
विध्वंस के ढ़ेर पर बैठ,
तेरे मन में पनप रहे शैतानियों से,
फिर भी मुझे पता है, 
मानव तुम्हें डर नहीं लग रहा,
मैं खुद डर रहा हूं,
तेरी अति महत्वाकांक्षाओं को देख,
मेरे मन में उत्पन्न होने वाले हैरानियों से...

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