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४२. अपनों की उड़ान @

जिंदगी है हर पल इम्तिहान, डर नहीं लगता है, बिना गुनाहों की सजा पाता रहा हूं, इसी बात से दिल डरता है... मुस्कुरा कर गम छिपा लेता हूं, जबकि अंदर एक ज्वालामुखी जलता है, अंधेरों से हमारी पुरानी दोस्ती है, मेरी जिजीविषा से थोड़ा थोड़ा यह भी जलता है... अस्कों को इसलिए संभाल कर रखा है, साथ जलने वाले दियों की तपिश कम ना हो जाए, मेरा हौंसला जिनके उड़ान का कारण है, उनकी ऊंचाई कम ना हो जाए ... *दीपावली की शुभकामनाएं* ✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी*

११७. यादों की कुर्बानी *

यादों की कुर्बानी ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी कर रहा था दिवाली की सफाई, ना जाने क्यों आंखे डबडबाई, यादों के झरोखों से कोई घूर रहा है, महफली से भली लगती है तन्हाई... दिल तुम्हारा कुछ ज्यादा ही साफ़ है, इसलिए कई लोग तुम्हारे ख़िलाफ़ है, अपनी मन की करके बहुत खुश हो, या मेरे से बेहतर की तुम्हें तलाश है... तेरी यादों से सुंदर किसका साथ है, मेरे दिल ने भी उससे पूछ लिया, आंखे छिपाकर क्यों फफक रही हो, क्या खुद के जख्मों पर नमक छिड़क रही हो, कल भी तुम बहुत अकेले थे, आज भी तुम उतने ही तन्हा हो, नमक छिड़क भी खुश हो जाऊंगी, अफसोस तुम तन्हा, मैं दूर जिंदा हूं... आख़िर क्या चाहती हो तुम ? दुनियां से रुखसत हो जाऊं, अपने क़िस्मत को कितना मैं कोसूं, क्या छिपा है तुमसे जो बताऊं... अपनी जिद्द में सबकुछ खोया है, दुनिया छोड़  कर क्या तुम पाओगे, सारे घर की सफाई तो कर ली तूने, अपनी यादों से मुझे कब मिटाओगे...