* लेखक की कलम से * मनुष्य कितना भी प्रयत्न कर ले लेकिन अक्सर मनुष्य की नीयत और नियति में एक बहुत बड़ा फासला होता है। इसके लिए निसंदेह बहुत सारी स्थितियां और परिस्थितियां जिम्मेदार होती है और विषम से विषम परिस्थितियों में भी सबसे बड़ा सत्य वर्तमान होता है। भूत को हम कोस सकते हैं और बेहतर भविष्य की कामना कर सकते हैं लेकिन इन तमाम किन्तु परन्तु के बीच जीवनधारा अपने ही मदमस्त चाल में अनवरत चलती रहती है। अपनी प्रथम पुस्तक काव्य संग्रह जीवनधारा में जीवन के विभिन्न कालक्रम में अपनी अनुभूतियों को छंदबद्ध पंक्तियों में प्रस्तुत करने का मैंने छोटा सा प्रयास किया है। एक साधारण किसान का लड़का होने के कारण, किसानों की समस्याओं, उसके टूटते - बिखरते सपनों और फिर एक नई आशा की मद्धिम सी किरण एवं सुनहरे भविष्य की तलाश में नए उत्साह के साथ जीवन जीने का पराक्रम, मैंने बहुत करीब से महसूस किया है। इसलिए मैंने अपनी कविताओं में अन्नदाता किसान परिवार की पीड़ा के चित्रण का भी प्रयास किया है। पालनहार का संस्कार और मजबूर अन्नदाता मेरी इन्हीं भावनाओं को अभिव्यक्त करती हुई कविताएं हैं। मैंने उदास, निरा...