#झमेला
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
लेकर आए, मेरे लिए लाख दुवाएं,
फिर भी दिल ने मुझको रोका है,
कर परख कर स्वीकार दुवाएं,
दरिया दिल दिखावा, अंदर धोखा ही धोखा है,
रजनी की भयावह कालीमा से क्यों भयभीत,
इसकी सादगी दुर्लभ, सरलता अनोखा है,
चकाचौंध रोशनी करती भले आकर्षित,
कलंक अदृश्य, श्रृंगार बहुत ही मैला है,
डगर कठिन, मगर है मुमकिन,
आत्मविश्वास तेरा क्यों डोला है,
पथ सुगम बताता है दुर्जन,
बिना तर्क बनता क्यों भोला है,
मित्रों के भीड़ में मत बन भेड़,
यह भेड़ियों का टोला है,
अपेक्षाएं रख अपनी सीमित,
परिस्थितियों ने मित्रों को तौला है,
आए जो काम, कठिनता तमाम,
होने देते नहीं तुम्हें अकेला है,
रखो इनका ख्याल, हो चाहे कितना बबाल,
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