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जून, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

इंकलाब जिंदाबाद...

इंकलाब जिंदाबाद... संप्रभुता का आया गंभीर संकट, उचित नहीं राजनीतिक नाटक, मां भारती कर रही पुकार, विश्वासघाती चीनियों का हो संहार, नेपाल सिर्फ एक मोहरा है, षड्यंत्र बहुत ही गहरा है, बेशक सीमा पर वीर जवानों का पहरा है, देश के अंदर कुछ चेहरों पर कई चेहरा है, बासठ का ज़ख्म हमें भूलना नहीं चाहिए, वाजपेईजी के जिम्मेदार विपक्ष का अनुकरण करना चाहिए, राजनीतिक प्रतिद्वंदिता चलती रहेगी, हमारी एकता और राष्ट्र की अखंडता अक्षुण्ण रहना चाहिए, देश के कोने कोने से आ रही एक आवाज, बता दो दुश्मनों को उसकी औकाद, हर धर्म से ऊपर हमारा राष्ट्रवाद, आओ सब मिलकर बोलें, इंकलाब जिंदाबाद...

हमदर्द

हमदर्द ----------------------------------- दुश्मन बनाने का मुझे शौक नहीं, कोई इसी काबिल है, तो मैं क्या करूं, मेरे जनाजे को कंधा देने वाले, बेशक मेरे अपने होंगे, मेरा जनाजा उठने की चाहत रखने वाले, तुझे मैं कैसे अपना कहूं, आंखो का आंसू,  हमेशा सच नहीं होता है, किसी की मुस्कुराहटों की खातिर, अपनी आंखो का आंसू छिपाने वाले, दुनियां में इससे बड़ा हमदर्द नहीं होता है,

श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि --------------------------------- सूनी गोद का दर्द, हृदयविदारक चीत्कार, जल्दी लौट कर आऊंगा मा, जब देखा था उसे आखरी बार, उजड़ी हुई मांग, जिंदगी का होना वीरान, तुम्हें तेरे सुहाग की सौगंध, रोना मत, मेरी जिंदगी, मेरी जान, कौन देगा इन्हें तस्सली, कौन सुनाए इन्हें पैग़ाम, तेरे बलिदान को शत शत नमन, तेरे परिजनों को प्रणाम ...

सिंहालोकन

सिंहावलोकन ------------------------------------- हकीकत में दिखता नहीं है, महफिलों में बिकता वही है, उलझनों की गठरी में फंसी जिंदगी, जो कहता है, करता नहीं है, जो करता है, कहता नहीं है, संन्यास, विकास, एहसास, इतिहास और सत्यानाश, छिपाए छिपती नहीं है, बताए दिखती नहीं है, लेकिन आदमी होशियार है, करता कई कई श्रृंगार है, चांदनी रात चाहे कितनी ख़ूबसूरत हो, उगते सूर्य के सामने सब बेकार है...

राजपूत सुशांत

राजपूत सुशांत... ---------------------------------------------- राजपूत सुशांत, तेरे चाहने वाले आज बहुत अशांत, पवित्र रिश्ता से बनाया अपनी पहचान, पर्दे पर किया तूने जीवंत, द ग्रेट धोनी महान, जिंदादिली थी तेरी पहचान, सोसल मीडिया पर तेरे लाखों फॉलोअर्स, सभी बिहारियों का तूं था अभिमान, फिर किस बात ने किया तुझे यूं परेशान, किंकर्तव्यमुढ़ कर गया तेरा देहांत...