तेरी बेवफ़ाई की सौगात से कोई जन्नत सजाने वाला है ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी सुना है कल तेरे दर पे बारात आने वाले है, तेरी दिल की गलियों में कोई प्यार की बांसुरी बजाने वाला है, इन शहनाई की गीतों के बीच कोई उन्हीं गलियों में बेवफ़ाई के नगमे भी गाने वाला है, तेरी बेवफ़ाई की सौगात से कोई जन्नत सजाने वाला है... तेरे मोहब्बत की गलियों में भटका मैं एक मुसाफ़िर हूँ, तूने अपना धर्म बदल लिया, दुनियाँ की नजरों में मैं अब काफ़िर हूँ, काफ़िर बन कर भी तेरी मोहब्बत के धर्म को कोई निभाने वाला है, तेरी बेवफ़ाई की सौगात से कोई जन्नत सजाने वाला है ... इन्हीं हंसी वादियों में मुस्कुरा कर तूं रुखसत हुई थी, चाँद तारों की गवाही में तेरे इश्क़ के इजहार से मेरी जिंदगी जन्नत हुई थी, पूरी जिंदगी इसी जन्नत में तेरे झूठे वादों कोई गुनगुनाने वाला है, तेरी बेवफ़ाई की सौगात से कोई जन्नत सजाने वाला है .... हाथों में किसी और के नाम की मेहंदी सजा कर बहुत ख़ुश होगी, तेरे लबों पर ग़लती से सही किसी और का नाम आने वाला है, तेरे हाथों की मेहंदी का रंग भी कोई नाम भुलाने वाला है, तेरी बेवफ़...