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जून, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जीवन गीत

पाने की ख्वाइश सबको है, यहां बोना कोई चाहता नहीं, हंसने की ख्वाइश में गदर, आंख भिंगोना कोई चाहता नहीं, सृष्टि का यह कठोर नियम, बिना दर्द होता नहीं सृजन, संघर्षपथ से हो जाए जो विचलित, उसके साथ विधाता भी नहीं, आंखों में दर्द का सैलाब छिपाए, सपने जिन नयनों से ओझल होता नहीं, विघ्न भी होता उनके कदमों में नतमस्तक, लक्ष्य से वह भटकता नहीं, पीड़ाएं लाख सह कर भी, जो दिल में सिद्धांतों का गंगाजल रखता है, सफलताएं चूमती है उनका कदम, परिस्थितियों का मोहताज वह होता नहीं

वोटों का कीमत

वोटों का कीमत ----------------------------------------- ✍🏽 बिपिन कुमार चौधरी सपनों का दिखा कर नजराना, बनाया तूने दिवाना, तेरी दिवानगी में होकर कायल, मैं गाता रहा तराना, सच पूछो हमारी जिंदगी में कुछ भी बदला नहीं, किसे दिखाए हकीकत और किसे बताए अफसाना, सिर्फ ख्वाब हमारे टूटे नहीं, दिल भी हमारा टूटा है, जिनसे पाली उम्मीदें हमने, उसी ने हमें क्या लूटा है, सियासत के चाल अजीब, रंग कोई समझ नहीं पाया, इसमें तेरी कोई गलती नहीं, मुकद्दर ही हमारा रूठा है, बदल बदल कर देखे हमने, सबको आजमाया है, सत्ता में बैठ कर उसी ने औकाद हमें बताया है, हमारी जिंदगी की जिनकी नजरों में कीमत नहीं, हर बार उसी ने हमें, वोटों का कीमत बताया है,

जनता के मन की बात

*जनता के मन की बात* ✍🏽 *बिपिन कुमार चौधरी* जिस किसी को भी हमारी जिंदगी से यहां खेद है, बन गई उसकी जिंदगी, ना जाने कौन सा भेद है, आज भी अपनी छिद्रों में पैबंद लगाता रहता हूं, पता नहीं, जिंदगी या सिस्टम किसमें ज्यादा छेद है, आंसू बहा बहा कर जिसने भर दिया घड़ा, हक हमारा मारने से दिल उसका नहीं भरा, अच्छे दिनों की यादों में नींद भी आती नहीं, राष्ट्रहित में कितना त्याग, हूं सहमा और डरा हमारा दर्द सुनने को उन्हें वक्त नहीं है, अपनी सुनाने से उन्हें फुरसत नहीं है, इसी कश्मकश में हम वक्त काट रहे हैं, कौन चोर, कौन मोर, वो ज्ञान बांट रहे हैं, चोरों पर करो कार्रवाई, हम दिल से देंगे वाहवाही, अगर अब भी हो रहा चूक, बताओ किसकी लापरवाही, कभी वक्त निकाल, चुनावी भाषण सुन लिया करो, हम भले कुछ नहीं बोलें,हर बात आपको देगी सुनाई,

देशद्रोही

देशद्रोही हमें रहने दो खामोश,  सुन नहीं पाओगे, हमें क्या तकलीफ है, तेरी हुकूमत का बड़ा जलवा है, सच बोलने पर भी लगाई बंदिश है, मुबारक हो तुम्हें,  तुम्हारे सपनों का सलतनत, अपने गुजरे कल से बेशक हम खुश नहीं, आजकल देशद्रोही बताना भी बड़ा अजीब है... @ बिपिन कुमार चौधरी

हमारी संस्कृति

*हमारी संस्कृति* ✍🏽 *बिपिन कुमार चौधरी* कितने आए, कितने गए, हम अदभुत हैं, कहकर गए, हर दिल में हमने जगह बनाया, कुछ रह गए, कुछ रहकर गए, कुछ चोर लुटेरे बन कर आए थे, ऐसे पापी बुद्ध के शरण को गए, ललकारा जिसने भी हमें रण में, हुआ अंगभंग, कुछ मरण को गए, राष्ट्रप्रेम में देख हमारा बलिदान, हमारी मातृभूमि के शरण को गए, किसी धर्म से किया नहीं भेदभाव, सभी धर्मगुरु यहां तर्पण पा गए, संस्कृति पर किया जिसने प्रहार, हम उसका सर कलम कर गए, हिंदी हमारी मां, उर्दू हमारी मौसी, कितने दुष्ट यहां सज्जन बन गए, संप्रभुता, धर्मनिरपेक्ष, पंथनिरपेक्ष,  सारी दुनियां का हम दर्पण बन गए, विश्वगुरु के हम सच्चे अधिकारी, दुखद कहां थे हम, कहां आ गए...

सिसकियां

#सिसकियां... ✍🏽 बिपिन कुमार चौधरी हर तरफ अंतहीन तबाहियों का दौड़ है, लेकिन यहां चारों ओर अजीब शोर है, परमात्मा को टुकड़ों टुकड़ों में बांट कर, धर्म के ठेकेदार एक दूसरे को बताते चोर हैं, इंसानियत से जिनका कोई नहीं वास्ता, ऐसे ही सिरफिरों का हर जगह जोर है, मजहब की दीवारें खड़ी कर दी जिन लोगों ने, वही बताते रहे, कौन चौकीदार और कौन चोर है... तुम्हारी ताकत से हमें कोई शिकवा नहीं, हमारी मोहब्बत में फिर जहर क्यों घोलते हो, कुर्सी की लड़ाई में तुम सिरफिरे बनकर, खतरे में हमारा धर्म, क्या खूब बोलते हो, फिरंगियों की दास्तां से ज्यादा दर्द अब होता है, राजा रहते महलों में, आम इंसान भूखा सोता है, तकलीफ हमारी दूर करने का वादा खूब होता है, बाबा पर उठती अंगुली, बापू नोटों में छप रोता है,

संकट में बच्चों का भविष्य...

संकट में बच्चों का भविष्य... ------------------------------------------- आभाव वश शिक्षक वृत्ति, प्रभाववश मिली स्वीकृति, शिक्षा का हो कैसे उत्थान, बिना प्रवृत्ति और संस्कृति, शिक्षण में दिल लगे नहीं, वर्ग में आते मानो अतिथि, परिणाम शून्य सभी योजनाएं, बिना बदले प्रकृति व प्रवृति, राष्ट्रनिर्माता के गौरव से गर्वित, कर्त्तव्य विमुख बनकर पतित, अपना ही दुखड़ा गाते हैं नित्य, गंभीर संकट में बच्चों का भविष्य,

उम्मीद ...

उम्मीद ... समस्याएं कल भी थी, समस्याएं आज भी है, रास्ते कल भी कठिन थे, आज भी आसां नहीं है, चुनौतियां कल भी थी, मुश्किलें आज भी कहां कम है, फिर भी खिलखिला लेता हूं क्योंकि जीवन में उम्मीद है, उम्मीदों के हवा महल में उड़ने से क्या होगा, इस कदर यूं बार बार पीछे मुड़ने से क्या होगा, किसने क्या किया, इस बात पर लड़ने से क्या होगा, अंतर्कलह में जीवन करके बर्बाद मरने से क्या होगा, अपनी ऊर्जा करके एकत्र, आओ करें ऐसी हुंकार, दिखे सिर्फ मछली की आंख, भूल जाएं सारा संसार, वक्त को कौन रोक पाया, आओ बनाएं इसे यादगार, कर्म का फुल जब खिलेगा, स्वर्ग बन जायेगा संसार,