*गांव से निकला, छोरा मस्तमोला* गांव से निकला, छोरा मस्तमोला, साथ में सपनों का एक बड़ा बोझ, कब होगी नौकरी, कब कमाओगे रुपया, पूछे फोन पर सब यहां हर कोई रोज, दिल का हाल, यहां किसे बताएं, सबको लगे शहर में काट रहे हम मौज, सतुआ खिचड़ी खा कर रहे खूब प्रयास, हर रिजल्ट बाद देते खुद को खूब दोष, रोना धोना कहां सीखा हमने, दुनियां को दिखाना है जोश, हम गंवारों का मत उड़ाओ मजाक, एक झटके में हम उड़ा देंगे सबका होश... ✍🏻 *कवि विपिन वियान 'हिंदुस्तानी'*