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जून, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

इंतिज़ार

इंतिज़ार ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी अपनी गलियों से सबको होता प्यार है, दूसरी गलियों को भी मेरा इंतिजार है, मेरी खुशनसीबी पुरानी गलियां भी गुलज़ार है, नई गलियां भी मेरे स्वागत को तै...

५२. जवानी @

जवानी ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी जीवन के अतीत के पन्नों की भी अजीब कहानी है, जिंदगी उमंगों में बिताना हीं जिन्दगानी है, बचपन बडे़ होने के सुखद अहसास का भेंट चढ़ गया, बुढ़ापा आने पर समझ आया सबसे बेहतर जवानी है... जिससे पूछो समस्याओं से घिरी एक कहानी है, बेरहम वक्त ने किया बहुत मनमानी है, नर निराश ना हो समस्याएं आनी-जानी है, सच पूछो बिना संघर्ष व्यर्थ यह जवानी है.... जीवन सुख-दुःख का हीं रवानी है, खुशियों का एहसास भी आँखो में लाता पानी है, बाधाओं से मुस्कुरा कर जूझने वालों का जग भी  दीवानी है, चुनौतियों के चोटी पर झंडा फहराये वही जवानी है,

८७. भाभी का आतंक @

भाभी का आतंक   (हास्य कविता) ✍ बिपिन कुमार चौधरी उसकी आँखो में खौफ़ देख दोस्तों का आँख भर आया था, पूरे बदन पर जब उसने झाड़ू का दाग दिखलाया था, ग़लती कुछ ख़ास नहीं दोस्तों के संग दो पेक लगाया था, मामूली ग़लती का बड़ा बेरहम सजा उसने पाया था... ऋषि बोला गदहे तूने झाड़ू क्यों नहीं छिपाया था, इसी ग़लती ने कभी बेलन से उसका नाक तुड़वाया था, अपनी बहादुरी का बखान करने वाला बुरी तरह शरमाया था, इसी ख़ुशी में दोस्तों ने फ़िर कई पेक उसे पिलाया था... नशे में बदहवास फ़िर भी भाभी के डर से किसी ने घर नहीं पहुंचाया था, दोस्तों के इसी बेरहमी ने उसे आज बहुत रुलाया था.. शुभ मूहर्त में ना जाने किस आफ़त को घर लाया था, भाभी को सामने देखते हीं उसका सारा नशा उतर आया था... मुंह की बदबू ने आज फ़िर उसे बुरी तरह फंसाया था, बेचारा बनवारी भाभी के हाथों  झाड़ू से ख़ूब मालिश करवाया था... दोस्तों के महफ़िल में इस ख़बर ने हरकंप मचाया था, सभी की पत्नियों ने भाभी श्री को अपना नेता बनाया था... दोस्तों के महफ़िल में भाभी के आतंक ने धूम मचाया है, आजकल सबकी जुबां पर एक हीं  सव...

५३. न्याय का बाज़ार @

न्याय का बाज़ार ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी काला कोर्ट भी दागदार हुअा है,  अन्याय के जख़्मों से यादगार हुअा है,  लक्ष्मी की बेवफ़ाई से निर्धन लाचार हुअा है,  न्याय का मंदिर भी बाज़ार हुअा है .. काले कोर्ट की धाराओं में पढ़ा लिखा गंवार हुअा है,  धनवानों के गुनाहों को छिपाने का यह हथियार हुअा है,  कानूनबाजी के गफलत से जीवन इनका गुलजा़र हुअा है,  न्याय का मंदिर भी अब बाज़ार हुअा है .... शोषण दमन से पीड़ित व्याकुल संसार हुअा है,  इनकी कारिस्तानि से अपराधी होशियार हुअा है,  इंतिज़ार में पलकें पथराई न्याय की आश में बेकरार हुअा है,  न्याय का मंदिर भी अब बाज़ार हुअा है ... अंबेडकर के वंशजो का यह क्या हाल हुअा है,  विधियों की उलझनों में आमजन बेहाल हुअा है,  न्याय के विश्वास पर आघात बहस शानदार हुअा है,  न्याय का मंदिर भी अब बाज़ार हुअा है ... विश्वसनीयता धूमिल काले कोर्ट का अजीब संस्कार हुअा है, न्याय मिले ना मिले पूज्यनीय यह मजार हुअा है,  गरीबों के अरमानों का यहाँ कई बार बलात्कार हुअा है,  न्याय का मंदिर भी अब ब...

५५. मानवता से प्रेम का साहस @

मानवता से प्रेम का साहस बिपिन कुमार चौधरी जीवन में आँधियों का दौड़ है, समस्याओं का पहाड़ चहुंओर है, मानव की जिजीविषा कहाँ रणछोर है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है... आने वाला अभी कठिन कई मोड़ है, चुनौतियों के वज्रपात का चारों ओर शोर है, कर्मवीर की कर्मठता का हीं सर्वत्र ठौर है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है, अश्रुधारा के स्नेहाशीष से पावन दिल कठोर है, महत्वाकांक्षा का उल्लास करता  नृत्य जैसे मोर है, अंधकार पर विजय हेतु  आनेवाला संघर्ष का भोड़ है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है, अपना-पराया के अहंकार को वक्त ने दिया झकझोड़ है, स्वार्थी अपनापन का भीड़ भागा छोड़ है, इंसानियत से रु ब रु मानवता का स्वर्णिम दौड़ है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है, कुरआन की आयत, भगवान की इनायत, आराधना की सभी विधियों का अंतिम निचोड़ है, ढ़ाई आखर प्रेम से बढ़िया धर्म नहीं कोई और है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है...

ऐसे नियमों को हम भारतीयों का धिक्कार है ...

ऐसे नियमों को हम भारतीयों का धिक्कार है ... ✍ बिपिन कुमार चौधरी बलिदान बैज पर मचा क्यों यह हाहाकार है, शौर्य के सम्मान का नहीं हमें अधिकार है, आई.सी.सी को हमारा निवेदन भी  अस्वीकार है, ऐसे नियमों को हम भारतीयों का धिक्कार है ... अनहोनी को कर दे होनी, नाम इसका महेंद्र सिंह धोनी, दिमाग इसका रहता बहुत हीं ठंडा, राष्ट्रीय स्वाभिमान हेतु लेता है अक्सर पंगा, गल्बस से बैज हटवाना बहुत बड़ा खिलवाड़ है, ऐसे नियमों को हम भारतीयों का धिक्कार है ... बेवजह टिका-टिप्पणी हमारी आदत नहीं, अन्याय के आगे झुकना हमारी फ़ितरत नहीं, अपने जवानों की शहादत पर गौरव अगर ग़लती है, ऐसी गलतियों की सजा भी हमें स्वीकार है, ऐसे नियमों को हम भारतीयों का धिक्कार है ... नियमानुकुल व्यवहार भारतीय संस्कार है, जगतगुरू के वंशज हम, उच्चकोटि का हमारा व्यवहार है, भारतीय अस्मिता से हमें जान से ज्यादा प्यार है, धोनी तेरे साथ हम, घर घर से आई पुकार है, ऐसे नियमों को हम भारतीयों का धिक्कार है ...

अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है ...

अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है... ✍ बिपिन कुमार चौधरी दरिंदगी की यह बेहद इंतहा है,  मासूमों की चीखों से हम सिर्फ़ शर्मिंदा हैं, माँ की गोद दहाड़ मार कर रो रही है, अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है... माना जमाना कभी सुरक्षित नहीं था, इतना भी यह असुरक्षित नहीं था, मानवता का यह चरम पतन है, ईश्वर भी किंकर्तव्यविमूढ़ है, ऐसा वीभत्स यह यौन हिंसा है, अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है ... ईश्वर ने किया था जब चमत्कार, भ्रूण हत्या के संकट को किया पार, अभी जुबां से बोल भी नहीं फुट पायी थी, यह क्रूरता से भी क्रूर विपदा आयी थी, ममता की सुनी गोद में मातम का पसरा सन्नाटा है, अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है .... बच्ची का कोमल अंग, राक्षसों के स्पर्श से हुअा अपंग, मासूम के चीत्कारों का मुश्किल वर्णन, क्षत-विक्षत शव के विलाप से ब्रह्मांड भी कांपा है, अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है ... हत्यारों का कोई दोष नहीं है, हिजड़ों की जमात को होश नहीं है, राक्षसों की हैवानियत से संरक्षक सिर्फ़ शर्मिंदा है, अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है...

५४. उम्मीदों का शीशमहल @

उम्मीदों का शीशमहल ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी अपनी हीं परछाईं से लोग ना जाने क्यों परेशान  है, गंगू तेली बन बैठा सिकंदर राजा भोज गुमनाम है, नक़ली आंसुओं के भेंट चढ़ गये भव्यता लिये जो अरमान है, रब की मेहरबानी है या किसी के दिये सौगातौ का एहसान है, उलझनें अक्सर उनकी बढ़ जाया करती है, उम्मीदों के शीशमहल में करता जो आराम है, छटपटाहट अक्सर उनकी कुछ ज्यादा दीखती है, इंसानी कायदों से रहते जो अनजान है, अपनों के अपनापन की इतनी भी तलाश क्यों ? ? नीड़ के सागर के बीच बेसब्री की यह प्यास क्यों ? ? ऊपर वाले भी हमारी मजे ले रहे हैं, प्रसन्नता की चाहत में हर कोई इतना उदास क्यों ? ? हालात समझना मुश्किल अंगुली उठाना आसान है, जीवन के तपोभूमि में खचाखच भीड़ के बीच सुनसान है, इस भीड़ में भी अपनी चमक खोने नहीं देना, कर्मवीर की यही सबसे बड़ी पहचान है...