अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है... ✍ बिपिन कुमार चौधरी दरिंदगी की यह बेहद इंतहा है, मासूमों की चीखों से हम सिर्फ़ शर्मिंदा हैं, माँ की गोद दहाड़ मार कर रो रही है, अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है... माना जमाना कभी सुरक्षित नहीं था, इतना भी यह असुरक्षित नहीं था, मानवता का यह चरम पतन है, ईश्वर भी किंकर्तव्यविमूढ़ है, ऐसा वीभत्स यह यौन हिंसा है, अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है ... ईश्वर ने किया था जब चमत्कार, भ्रूण हत्या के संकट को किया पार, अभी जुबां से बोल भी नहीं फुट पायी थी, यह क्रूरता से भी क्रूर विपदा आयी थी, ममता की सुनी गोद में मातम का पसरा सन्नाटा है, अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है .... बच्ची का कोमल अंग, राक्षसों के स्पर्श से हुअा अपंग, मासूम के चीत्कारों का मुश्किल वर्णन, क्षत-विक्षत शव के विलाप से ब्रह्मांड भी कांपा है, अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है ... हत्यारों का कोई दोष नहीं है, हिजड़ों की जमात को होश नहीं है, राक्षसों की हैवानियत से संरक्षक सिर्फ़ शर्मिंदा है, अफ़सोस ट्विंकल का हत्यारा जिंदा है...