फ़िर कोई जे.पी. आने वाला है ... ✍ बिपिन कुमार चौधरी एक स्वराज का आँधी आया था, फ़िरंगी ताकत को जड़ से मिटाया था, शोषण और दमन के स्याह का पटाक्षेप करने, भारत माँ के सपूतों ने ख़ून की नदियाँ बहाया था ... बच्चे-बूढ़े, मजदूर-किसान, मातृशक्ति हो या ग़रीब घर का नौजवान, सबकी आँखे चमक उठी थी, लोकतंत्र के मठाधीश करेंगे सब समाधान... उषा की इस नई बेला में, नेतागीरी की इस झमेला में, हिंदु-मुस्लिम, मंदिर मस्जि़द पर देश हमारा अटका है, अमर शहीद स्वर्ग में सोच रहे लोकतंत्र कहाँ ये भटका है ... भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का बोलबाला है, जमीन से जुड़ी जनता का नहीं यहाँ कोई सुनने वाला है, लोकतंत्र के मठाधीशो ने न्याय के पर को भी क़तर डाला है, आम आदमी आज भी निर्बल, सिस्टम गड़बड़झाला है ... विकास का दिवास्वप्न दिखाने वाले, ख़ुद को जनता का मसीहा बताने वाले, जुबां शहद सा मीठा और दिल तुम्हारा क़ाला है, तेरे कुकर्मों का हिसाब करने, फ़िर कोई जे.पी. आने वाला है ...