परिवर्तन ------------------------------------------------- समृद्धि के पीछे मैं था भागा, रहा फिर भी मैं अभागा, जिंदगी बहुत दूर जा चुकी थी, जब तलक मैं था जागा... जड़ निस्तेज, तेज शाखा, दुनियां हैरत में, इतना तेज भागा, मेरी खुशियां रह गई पीछे, मैं आगा, जब तलक मैं था जागा ... संसाधन कम था, हिम्मत ज्यादा, पग पग पर था अनंत ही बाधा, विजय किया प्राप्त, छूट गया रिश्ता नाता, जब तलक मैं था जागा... पीड़ाएं बहुत थी, फिर भी था राजा, छोटी छोटी बातें करता था साझा, बड़ी बड़ी खुशियों में अब आता नहीं मजा, जब तलक मैं था जागा... ठहाकों की खनक, फिका बाजा, मेरा अतीत मुझे वह दिन लौटा जा, तड़पता रहा बन कर कृष्ण, रोती राधा, जब तलक मैं था जागा... पहले रो कर भी था बात मान जाता, अब हर बात में हूं, अकड़ दिखाता, ताकतवर हुआ नहीं मैं, रूठ गया मेरा विधाता, जब तलक मैं था जागा...
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