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५५. मानवता से प्रेम का साहस @

मानवता से प्रेम का साहस बिपिन कुमार चौधरी जीवन में आँधियों का दौड़ है, समस्याओं का पहाड़ चहुंओर है, मानव की जिजीविषा कहाँ रणछोर है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है... आने वाला अभी कठिन कई मोड़ है, चुनौतियों के वज्रपात का चारों ओर शोर है, कर्मवीर की कर्मठता का हीं सर्वत्र ठौर है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है, अश्रुधारा के स्नेहाशीष से पावन दिल कठोर है, महत्वाकांक्षा का उल्लास करता  नृत्य जैसे मोर है, अंधकार पर विजय हेतु  आनेवाला संघर्ष का भोड़ है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है, अपना-पराया के अहंकार को वक्त ने दिया झकझोड़ है, स्वार्थी अपनापन का भीड़ भागा छोड़ है, इंसानियत से रु ब रु मानवता का स्वर्णिम दौड़ है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है, कुरआन की आयत, भगवान की इनायत, आराधना की सभी विधियों का अंतिम निचोड़ है, ढ़ाई आखर प्रेम से बढ़िया धर्म नहीं कोई और है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है...

१३१. माँ भारती चिंतित, किस डायन की नजरों से घायल भारतीय संस्कार है ... @

माँ भारती चिंतित, किस डायन की नजरों से घायल भारतीय संस्कार है... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी पुरुषोत्तम राम की धरती पर मचा  हाहाकार है,  आधुनिकता में काफी पिछे छूट गया संसार है,  संवेदनाएं मृत हुई ऐसा बदला मानवीय व्यवहार है,  माँ भारती चिंतित, किस डायन के नजरों से घायल भारतीय संस्कार है .. अतिथि देवो भवः, सबसे बड़ा धर्म परोपकार है,  इस पावन धरती पर कुसंस्कृति का कलुषित अत्याचार है,  मानसिक दरिद्रता से नष्ट हुई, मानवता लाचार है,  माँ भारती चिंतित, किस डायन की नजरों से घायल भारतीय संस्कार है ... दीपमालाओं से सजा कर जहाँ मनाया जाता त्यौहार है,  साधु-संतो की सेवा, निर्धन को दान जहाँ धर्म का आधार है,  मोह माया के त्याग का पाखंड करने वालों के मन में अब व्यभिचार है,  माँ भारती चिंतित, किस डायन की नजरों से घायल भारतीय संस्कार है ... पूज्यनीय जहाँ नदी-तालाब, मूर्ति संग पूजा जाता मूर्तिकार है, पशु-पक्षी संग नाग देवता भी श्रद्धा से प्राप्त करता आहार है,  सृष्टि में मानव के सृजनकर्ता माँ-बाप की उपलब्धि बेकार है,  माँ भारती चिंतित, किस डायन की नजर...