मानवता से प्रेम का साहस बिपिन कुमार चौधरी जीवन में आँधियों का दौड़ है, समस्याओं का पहाड़ चहुंओर है, मानव की जिजीविषा कहाँ रणछोर है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है... आने वाला अभी कठिन कई मोड़ है, चुनौतियों के वज्रपात का चारों ओर शोर है, कर्मवीर की कर्मठता का हीं सर्वत्र ठौर है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है, अश्रुधारा के स्नेहाशीष से पावन दिल कठोर है, महत्वाकांक्षा का उल्लास करता नृत्य जैसे मोर है, अंधकार पर विजय हेतु आनेवाला संघर्ष का भोड़ है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है, अपना-पराया के अहंकार को वक्त ने दिया झकझोड़ है, स्वार्थी अपनापन का भीड़ भागा छोड़ है, इंसानियत से रु ब रु मानवता का स्वर्णिम दौड़ है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है, कुरआन की आयत, भगवान की इनायत, आराधना की सभी विधियों का अंतिम निचोड़ है, ढ़ाई आखर प्रेम से बढ़िया धर्म नहीं कोई और है, साहस का सिकंदर हीं जगत में सिरमौर है...