राधा का प्रेम ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी जिंदगी की जद्दोजहद, परेशानियों का सिलसिला, जब रास्ते कम हो बाधाएं ज्यादा, ऐसे में प्रेरणा बनती है राधा... कोई भटक जाता है, कोई मझधार से नैय्या खेता है, किसी की जिंदगी बन जाती है, किसी के आंखों में जीवन भर आंसू रहता है.... हम उन्हें पूजते हैं, जो कृष्ण की राधा थी, जिसका प्रेम अद्भुत अनुपम था, कृष्ण के कर्म पथ में कब वह बाधा थी... हर किसी को यहां बहुत गिला-शिकवा है, उनका प्रेम पवित्र हमारा रासलीला है, प्रेम की पवित्रता को जो समझ नहीं पाया, कर्मपथ से होकर विचलित जीवन को गंवाया... राजा बन कर भी कृष्ण के दिल में अजीब खालीपन था, त्याग समर्पण से भरा राधा का प्रेम पावन था, उच्छृंखलता दिखाकर अपना स्वाभिमान खोया नहीं था, काया की दूरी दिलों का मिलन ऐसा अद्भुत प्रेम उन्होंने किया था....