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अगस्त, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

१००. राधा का प्रेम @

राधा का प्रेम ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी जिंदगी की जद्दोजहद, परेशानियों का सिलसिला, जब रास्ते कम हो बाधाएं ज्यादा, ऐसे में प्रेरणा बनती है राधा... कोई भटक जाता है, कोई मझधार से नैय्या खेता है, किसी की जिंदगी बन जाती है, किसी के आंखों में जीवन भर आंसू रहता है.... हम उन्हें पूजते हैं, जो कृष्ण की राधा थी, जिसका प्रेम अद्भुत अनुपम था, कृष्ण के कर्म पथ में कब वह बाधा थी... हर किसी को यहां बहुत गिला-शिकवा है, उनका प्रेम पवित्र हमारा रासलीला है, प्रेम की पवित्रता को जो समझ नहीं पाया, कर्मपथ से होकर विचलित जीवन को गंवाया... राजा बन कर भी कृष्ण के दिल में अजीब खालीपन था, त्याग समर्पण से भरा राधा का प्रेम पावन था, उच्छृंखलता दिखाकर अपना स्वाभिमान खोया नहीं था, काया की दूरी दिलों का मिलन ऐसा अद्भुत प्रेम उन्होंने किया था....

४५. मेरे अपने जो रूठ गये @

मेरे अपने जो रूठ गये ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी शिकायत तो सबको मुझसे है,  तुम्हें है तो क्या बात हुई, आज तक किसी की शिकायत खत्म ना हुई, मैं थक गया और आधी जिंदगी बर्बाद हुई ... बेशक मुझसे कोई खुश नहीं है, मुझे खुश रखने का प्रयास कितनों ने किया है,  सारी जिंदगी में दूसरों को खुश रखने का प्रयास करूं, क्या इस धरती पर मैंने इसलिए जन्म लिया है... अपने दुख का लोग खूब ढोल पीटते हैं,  अपने गिरेबान में यहां झांकने की किसी को फुर्सत नहीं है, शिकायती लोगों से मैंने यूं ही दूरियां बना ली है, हर किसी के शिकायत को दूर करना अब मेरी आदत नहीं है... बहुत लोग पहले से रूठे हैं, कुछ और लोग रूठ जाएंगे, फिकर जिन्हें मेरी है वह आज भी मेरे साथ हैं, अफ़सोस क्यों करूं कुछ मतलबी लोग और भी टूट जाएंगे ... अकेलेपन से अब मुझे डर नहीं लगता है, हां आस्तीन के सांपों से बहुत डरता हूं, हर किसी को दिल में अब मैं नहीं बसाता हूँ, जो दिल में बसता है  उसी के लिये जीता- मरता हूं ...

११८. मेरा ओकाद *

मेरा ओकाद गैरों से ज्यादा मेरे अपने परेशान थे, मेरे वजूद से ज्यादा मेरी सोच से हैरान थे, मेरी खुशियों से  बड़ी तकलीफ़ उन्हें होती थी, मेरी मूर्खता पर भगवान भी हैरान थे ... मैं अपना दुःख जिनके संग बांटता था, मेरी समस्याओं का उनके पास समाधान था, मैं जिनके हौंसले पर योजनाएं बनाता था, वही लोग मेरे सफ़र का सबसे बड़ा व्यवधान था ... षड्यंत्र का क्या ख़ूब जाल उन्होंने बुना था, मदद के लिये जिन अपनों को मैंने चुना था, मेरे उतने रुपयों को उन्होंने बरबाद कर डाला, जितना मेरी अंगुलियों ने पहले कभी ना गिना था ... इन कागज के टुकड़ों में कोई ख़ास बात नहीं थी, जिंदगी का सौदा था, किसी की खैरात नहीं थी, हौंसला टूट गया था, क़िस्मत जाग कर भी रूठ गया था, तुम्हें कैसे बताऊँ, तुम्हें भूलने की मेरी ओकाद नहीं थी ... बेशक मेरी मजबूरियों का सजा तुमने पाया था, किस रात को तेरी यादों ने मुझे नहीं रुलाया था, तन्हाइयों के हर पल में दिल ने सिर्फ़ तुझे चाहा था, कागज के इन्हीं टुकड़ों ने मेरी बगिया को थोड़ा सजाया था...

११९. गुमान *

गुमान ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी उन्हें बहुत गुमां है, रब ने खूबसूरत बनाया है, कृपा उनपर पर रब की है, इसलिये हमने भी तारीफ़ फ़रमाया है... दुनियाँ से अलग हम इतना हीं गुनहगार  हैं,  हमने वह किया जिसका रब हक़दार है, ग़लत मायने निकाल कर यूं कीचड़ ना उछालो, शराफ़त ख़त्म होने से पहले ख़ुद को संभालो ... तुम जैसे कितने गुमांवाले आये औऱ गये, जिस नजर से देखा हम वैसा हीं बन गये, मेरा दिल कोई धर्मशाला नहीं है, यह कोई दिलफ़ेंक मजनू मतवाला नहीं है ... हमारी पसंद बन जाना, इतना भी आसान नहीं है, गुमां वालों की मैं गुलामी करूं, ऐसा इस दिल का कोई अरमान नहीं है ... इस दिल में जिसने जगह बनाया था, रब ने बड़े फुरसत में उसे बनाया था, हालात ने कुछ यूं मुँह फ़ेर लिया, मेरे चाँद को बुरे वक्त के बादलों ने घेर लिया... मैं जानता हूँ, ऐसा कोई पूर्णिमा अब नहीं आयेगा, मेरे दिल को न सिर्फ़ मजनू मतवाला बनायेगा, जिसे देख तेरा गुमान गुमनाम हो जायेगा...

४६. ज्यादती @

४६. ज्यादती @ ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी हमदर्द बन कर आए वो, जिन्हें हमारे दर्द का पता नहीं था, कितने नासमझ बनते हैं ये लोग, जिन्होंने हमें यह दर्द दिया था ... तेरी गुस्ताखी कुछ ख़ास नहीं है, मैं हीं कुछ ज्यादा समझदार हूँ, भरोसा हर किसी पर करना मुनासिब नहीं, बिना दक्षिणा इस ज्ञान को देने का कर्जदार हूँ ... मेरे यक़ीन का महल राख हुआ है, बेशक बहुत बड़ा विश्वासघात हुआ है, फ़िर भी ख़ुश हूँ क्योंकि तेरी अदा गजबनाक है, खंजर भौंक कंधे पर हाथ रखना अब नहीं शर्मनाक है... गिरगिट भी शर्म से पानी-पानी हुआ, भीड़ में जब तूने रब से मेरे लिये मांगा दुआ, इतना बेहयापन तूने कहाँ से पाया है, सबकुछ निगल कर ख़ुद को भूखा बताया है... सत्ताधारी ना जाने क्यों भूल गये हैं, कितने सल्तनत धूल में मिल गये हैं, जनता इन कष्टों को झेलने की आदि है, तेरा इस कदर हमदर्द बनना सबसे बड़ी ज्यादती है ...

३७. दिया जलाने की आदत है ... @

दिया जलाने की आदत है ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी छोटा आदमी हूँ मेरा ओकाद भी छोटा है, अपने ईश्वर पर मुझे पुरा भरोसा है, चाहे क़िस्मत कितना खोटा है, कर्म करता रहता हूँ, फल मीठे कम खट्टे ज्यादा है, हौंसला कई बार टूट जाता है, फ़िर भी कुछ ख़ास करने का इरादा है, आंसू भी आंखो में आ जाता है, मेहनत मेरा फल कोई और पाता है, मायूस मैं कोई इतराता है, किसी का हक़ हड़पना मुझे नहीं आता है, वक्त का पहिया, कब रुका जो अब रुकेगा, क़िस्मत वालों बेशक खुशनसीब हैं, हौंसला कब झुका जो अब झुकेगा .... अतीत गवाह है, साहस कई मर्ज की दवा है, हार कर भी जिसे पूजता जहाँ है, इसलिय कुछलोग हमसे खफ़ा है.. कई अपनों का मन भर गया है, कई गैरों को अपना बना लिया है, कुछ अपनों को आज भी शिक़ायत है, कुछ गैरों को अपना बनाने की मेरी चाहत है ... मैं सिर्फ़ अदना इन्सान हूँ, छल - प्रपंच की दुनियाँ से थोड़ा अनजान हूँ, दोष जहाँ लोग भगवान पर भी थोप देते हैं, शिक़ायत से बच सकूं नहीं मैं ऐसा भगवान हूँ, अंधेरी गलियों से अक्सर गुजर जाता हूँ, लड़खड़ा कर गिरता फ़िर...

४७. पूज्यनीय @

पूज्यनीय ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी सुना-सुना लगती है यह जिंदगी, अनसुना जब रह जाये कोई विनती, सुनना हीं हमेशा समाधान नहीं होता है, सुन कर भी मनुष्य मनुष्यता खोता है... सुमिन्त्रा को सुन कर आयोध्या रोया था, दुनियां की सुन कर राम ने सीता खोया था, राज पाठ लूट गया जब हरिश्चंद्र सोया था, कहना मुश्किल किसने क्या काटा क्या बोया था ?? अक्सर परीक्षा अच्छे लोगों की होती है यहाँ, अद्भुत प्रेम फ़िर भी श्याम से महरूम हुई राधा, कर्ण दानवीर था, इसलिय ईश्वर ने हीं उसे छला, स्त्री दाव पर लगी, युधिष्ठर से सवाल किसने किया ? ? ? भीष्म ने अपनों के लिये सिंहासन त्याग दिया, उन्हीं अपनों ने संपूर्ण शरीर को बाणों से सजा दिया ... जीतने वालों की गलतियों को कौन पूछता है, पूज्यनीय वही यहीं यहाँ अंत में जो जीतता है ...