✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
आप सुरक्षित हो, सुरक्षित रहो,
इसलिए हम ड्यूटी पर तैनात हैं,
फिक्र हमारी, नहीं फैले कोरोना महामारी,
हमारे लिए क्या दिन और क्या रात है...
बेशर्मी से कानून तोड़ने वालों,
यह कैसा आपका संस्कार है,
अपनों की थोड़ी चिंता करो,
बदनसीबी हम, दूर हमसे हमारा परिवार है,
बनो गंभीर, नहीं लगाओ भीड़,
जिंदगी सुरक्षित, तभी सुंदर संसार है,
हुए संक्रमित, काम आए नहीं कोई प्रीत,
कितने होशियार चंद आज लाचार है,
नहीं तुम गुलाम, करो मत बदनाम,
ख़तरे में आज सारा संसार है,
बेमौत मरोगे, बेगुनाहों को भी मारोगे,
इसलिए कई मूर्खों ने खाया लाठी का माड़ है,
माना हो बिगड़े, फिर भी नहीं सुधरे,
चौराहे पर हमें भी तेरा इंतिजार है,
कभी सोचना कितना बदनसीब हम हैं,
लॉक डाउन में भी हम परिवार से दूर कितना लाचार हैं,
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