मजाक बना शहादत खुशियां पाने की हसरतें कहां से कहां ले आई, इन हसरतों ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई, काश इन हसरतों से मैंने तौबा कर लिया होता, बेशक सफलता कम मिलती लेकिन जिंदगी बेहतर होता, त्याग का नाम देकर जिन आंसुओं को पी लिया था, अपनों की बेहतरी के लिए ख़ामोशी से जी लिया था, अब वही ख़ामोशी तूफान बन कर तबाही मचा रहा है, और मेरी आंखे आंसुओं को अब नहीं छिपा रहा है, काश मैंने अपनी दिल का थोड़ा सुन लिया होता, अपनों को तकलीफ़ देने वाला रास्ता चुन लिया होता, ख्वाहिशें मेरी इस कदर बेवजह दफ़न नहीं होती, जिंदगी कदम कदम पर आहुतियों का हवन नहीं होती, मुकद्दर का सिकंदर बन कर भी हार गया, जिनके जीने के लिए मरा, वही मार गया, अपनी तो इन हालातों में जीने की पुरानी आदत है, बदत्तर उनकी जिंदगी है, जिसके कारण मजाक बना मेरा शहादत है,