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अप्रैल, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मजाक बना शहादत

मजाक बना शहादत खुशियां पाने की हसरतें कहां से कहां ले आई, इन हसरतों ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई, काश इन हसरतों से मैंने तौबा कर लिया होता, बेशक सफलता कम मिलती लेकिन जिंदगी बेहतर होता, त्याग का नाम देकर जिन आंसुओं को पी लिया था, अपनों की बेहतरी के लिए ख़ामोशी से जी लिया था, अब वही ख़ामोशी तूफान बन कर तबाही मचा रहा है, और मेरी आंखे आंसुओं को अब नहीं छिपा रहा है, काश मैंने अपनी दिल का थोड़ा सुन लिया होता, अपनों को तकलीफ़ देने वाला रास्ता चुन लिया होता, ख्वाहिशें मेरी इस कदर बेवजह दफ़न नहीं होती, जिंदगी कदम कदम पर आहुतियों का हवन नहीं होती, मुकद्दर का सिकंदर बन कर भी हार गया, जिनके जीने के लिए मरा, वही मार गया, अपनी तो इन हालातों में जीने की पुरानी आदत है, बदत्तर उनकी जिंदगी है,  जिसके कारण मजाक बना मेरा शहादत है,

जहरीला शब्द

जहरीला शब्द मुझे रहने दो गुमनाम,  अपनी काल्पनिक दुनियां में, यहां सुकून है, समझ है, फ़ुरसत है, इत्मीनान है, भावनाओं की कद्र है, खुद के होने का फख्र है, तेरी वास्तविक दुनियां में, कुछ भी वास्तविक नहीं,  षड्यंत्र है, प्रपंच है, लालच का नंगा नाच है, जिंदगी बदहवाश है, घुटन है, सिसकियां और सिहरन है, खामोशियों में बहुत कुछ दफ़न है, भींगी पलकों के बीच, खून से लथपथ कफन है, क्या सोच रहे, बहुत कड़वा बोलता हूं, निर्लज्जों को भरवा बोलता हूं, बेशक दूरियां बढ़ा लो, आगे हो सकता है, तुम्हें मेरी जरूरत नहीं, गिरगिट की तरह रंग बदल लूं, ऐसी हमारी फितरत नहीं...

आत्मदाह

*आत्मदाह* जिंदगी आसान नहीं, लेकिन मर कर, क्या हासिल होगा, मरने के बाद भी जलना है, फिर जिंदा जल कर, क्या हासिल होगा, अगर जलना है, तो ऐसे जलो, परेशानियां जल कर,  भस्म हो जाय, कर्म पथ पर नित्य यूं आगे बढ़ो, सारे विघ्न हल हो जाय, कौन रखेगा याद तुम्हें, इस मेले में रोज की यही कहानी है, अंतिम सांस तक, जिसने किया यहां संघर्ष, दुनियां उसी की दिवानी है, मूर्खता में उठा कर, यह मूर्खतापूर्ण कदम, करके तूने अपना अंग भंग, जीवन खुद का नरक बनाया है, क्षणिक आक्रोश में सब कुछ गंवा कर, बता तूने क्या पाया है... *✍🏻 -बिपिन कुमार चौधरी*

संघर्ष पथ*

*संघर्ष पथ* ---------------------------------------------- ✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी* आजकल के लोग भी कितने अजीब हैं, पैसों से अमीर, दिल से बिल्कुल गरीब हैं, दिमाग इनका शैतानी लेकिन बनते शरीफ हैं, पीठ पीछे शिकायत, मुंह पर करते तारीफ हैं, ईर्ष्या द्वेष का दिल में भंडार है, दुखी इसलिए, खुश क्यों संसार है, अपनी करनी का इन्हें कोई गम नहीं, बदलना इनको लेकिन पुरा संसार है, इनकी हर समस्या का दोषी कोई और है, इनका दिल जानता है, वह खुद कामचोर है, समस्याओं का सामना करने में इन्हें शर्म आता है, लोग हैं कितने खराब, यह दुनियां को बतलाता है, दूसरों की जिंदगी में ताक झांक इनकी आदत है, बनते ज्ञानी जबकि ऐसी जिंदगी पर लानत है, बातों से अक्सर यह जहर बहुत उगलते हैं, उसी जहर की नरक में तिल तिल जलते हैं, अपेक्षाएं बहुत लेकिन करना कुछ नहीं है, इतना बोझ लेकर क्या जीना, मरना यहीं है, दिल में जो है ख्वाइश, नित्य उसके लिए कर्म करो, हर हमेशा अंगुली उठाने वाले, थोड़ा तो शर्म करो... समस्या कोई नहीं ऐसा, जिनका समाधान नहीं, राम ने भी समंदर पर पुल बनाया , आया काम हनुमान नहीं, अपनी बनावटी सुरक्षा कवच से निकल कर जंग लड़ो, या...