जुनून की ज्वाला... --------------------------------------------- घनघोर अंधकार से जब घिरा हो मन, राहें सब ओझल, मझधार में हो जीवन, देवता हो कुपित, मुंह मोड़ ले परिजन, जीवन से निराश, विचलित हो अंतर्मन, ऐसे में बंधु तुम बिल्कुल मत घबराना, सारी दुनियां को थोड़ी देर भूल जाना, सिर्फ किताबों से तुम कर लेना याराना, समस्याएं सारी होंगी हल, इज्जत करेगा जमाना। अपेक्षाओं की बोझ से दब क्यों मर रहा है, क्या होगा कल, क्यों इतना डर रहा है, मत हो नर निराश, कर छोटा सा प्रयास, केंद्रित कर अपनी ऊर्जा, लिख नया इतिहास, आंख दिखाने वाले भी एक दिन आंख झुकाएंगे, था एक मेहनती आदमी, शौक से सबको बताएंगे, आओ करें प्रण, जुनून की ज्वाला है जलाना, चुनौतियों के समंदर में हमें खुद को है आजमाना...।