इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी उन्हें रब से भी शिक़ायत है, रब के बंदों से भी शिक़ायत है, अपने कर्मों से कोई गीला शिकवा नहीं, इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है ... जीवन हाथी पर बैठा महावत है, सृष्टि में सबसे सुंदर यह इनायत है, चींटी भी वक्त पर करता बगावत है, अहंकार के मद में ऊंचाई खोता महावत है, इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है ... दूसरों की तरक्की देख मन आहत है, सब कुछ पाकर भी हमें नहीं राहत है, चाहतों के मकड़जाल में फंसा इंसानियत है, ईश्वर को शबरी के जूठे बैर की चाहत है, इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है माना कि जिंदगी में बहुत कमी है, फ़िर भी कब हमारी जिंदगी रुकी है, जिसे हम हासिल कर चुके, दूसरों की सिर्फ चाहत है, इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है ... अपने बच्चों के मनमानी में हम हीं सबसे बडे़ रूकावट हैं, यही वक्त की सबसे गूढ़ नजाकत है, हम जिस रब के बच्चे उनकी भी कुछ चाहत है, इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है ... अपने मन से नहीं कर्मों के हिसाब से मांगो, दूसरों के दोष को तबेला के खूंटी में टांगों, फ़िर चारों ओर स्वर्ग सी यह इनायत है,...