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४२. अपनों की उड़ान @

जिंदगी है हर पल इम्तिहान, डर नहीं लगता है, बिना गुनाहों की सजा पाता रहा हूं, इसी बात से दिल डरता है... मुस्कुरा कर गम छिपा लेता हूं, जबकि अंदर एक ज्वालामुखी जलता है, अंधेरों से हमारी पुरानी दोस्ती है, मेरी जिजीविषा से थोड़ा थोड़ा यह भी जलता है... अस्कों को इसलिए संभाल कर रखा है, साथ जलने वाले दियों की तपिश कम ना हो जाए, मेरा हौंसला जिनके उड़ान का कारण है, उनकी ऊंचाई कम ना हो जाए ... *दीपावली की शुभकामनाएं* ✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी*

४३. जिंदगी का बोझ @

जिंदगी का बोझ ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी माना कंधे पर थोड़ा कम वजन है, बचपन की ख्वाहिशें भी दफन है, खुश हूं क्योंकि बदन से दूर कफन है, छोटी उम्र लेकिन हौसला मेरा बुलंद है... मेरी उम्र के बच्चे अक्सर रो लेते हैं, निश्चिंत होकर बेफिक्र सो लेते हैं, मैं सिर्फ क़िस्मत को गालियां दे लेता हूं, अपने पसीने से पेट की आग बुझा लेता हूं... मेरा बोझ देख दया बहुतों को आती है, कामचोर शराबी बाप को मां बहुत समझाती है, मेरे कमाए पैसों को यहां वहां छिपाती है, यही पीड़ा मेरे होंसले को बहुत रुलाती है ... मैं धीरे - धीरे रोना भी भूल गया हूं, वक्त के जालिम झूलों पर झुल गया हूं, कष्ट पहुंचा कर मैं भी अब खुश हो लेता हूं, दुनिया ने जो मुझे दिया वही उसे देता हूं ... मुझे किसी से मदद की उम्मीद नहीं है, मेरे जैसा हौसले का कोई अमीर नहीं है, मुझ पर दुनिया वाले बिल्कुल दया नहीं दिखाना, वक्त ने सिखा दिया है मुझे जिंदगी का बोझ उठाना...

३७. दिया जलाने की आदत है ... @

दिया जलाने की आदत है ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी छोटा आदमी हूँ मेरा ओकाद भी छोटा है, अपने ईश्वर पर मुझे पुरा भरोसा है, चाहे क़िस्मत कितना खोटा है, कर्म करता रहता हूँ, फल मीठे कम खट्टे ज्यादा है, हौंसला कई बार टूट जाता है, फ़िर भी कुछ ख़ास करने का इरादा है, आंसू भी आंखो में आ जाता है, मेहनत मेरा फल कोई और पाता है, मायूस मैं कोई इतराता है, किसी का हक़ हड़पना मुझे नहीं आता है, वक्त का पहिया, कब रुका जो अब रुकेगा, क़िस्मत वालों बेशक खुशनसीब हैं, हौंसला कब झुका जो अब झुकेगा .... अतीत गवाह है, साहस कई मर्ज की दवा है, हार कर भी जिसे पूजता जहाँ है, इसलिय कुछलोग हमसे खफ़ा है.. कई अपनों का मन भर गया है, कई गैरों को अपना बना लिया है, कुछ अपनों को आज भी शिक़ायत है, कुछ गैरों को अपना बनाने की मेरी चाहत है ... मैं सिर्फ़ अदना इन्सान हूँ, छल - प्रपंच की दुनियाँ से थोड़ा अनजान हूँ, दोष जहाँ लोग भगवान पर भी थोप देते हैं, शिक़ायत से बच सकूं नहीं मैं ऐसा भगवान हूँ, अंधेरी गलियों से अक्सर गुजर जाता हूँ, लड़खड़ा कर गिरता फ़िर...

५२. जवानी @

जवानी ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी जीवन के अतीत के पन्नों की भी अजीब कहानी है, जिंदगी उमंगों में बिताना हीं जिन्दगानी है, बचपन बडे़ होने के सुखद अहसास का भेंट चढ़ गया, बुढ़ापा आने पर समझ आया सबसे बेहतर जवानी है... जिससे पूछो समस्याओं से घिरी एक कहानी है, बेरहम वक्त ने किया बहुत मनमानी है, नर निराश ना हो समस्याएं आनी-जानी है, सच पूछो बिना संघर्ष व्यर्थ यह जवानी है.... जीवन सुख-दुःख का हीं रवानी है, खुशियों का एहसास भी आँखो में लाता पानी है, बाधाओं से मुस्कुरा कर जूझने वालों का जग भी  दीवानी है, चुनौतियों के चोटी पर झंडा फहराये वही जवानी है,

जिनकी खुशियाँ हमसे है, वही आज हमारे लिये पराया है ...

जिनकी खुशियाँ हमसे है, वही आज हमारे लिये पराया है ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी जिनके रहमोकरम से हमने यह सतरंगी दुनियाँ पाया है, रब मैं क्या जानूं रब के बारे में भी जिसने हमें बताया ...

१२०. तेरी बेवफ़ाई की सौगात से कोई जन्नत सजाने वाला है ... *

तेरी बेवफ़ाई की सौगात से कोई जन्नत सजाने वाला है ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी सुना है कल तेरे दर पे बारात आने वाले है, तेरी दिल की गलियों में कोई प्यार की बांसुरी बजाने वाला है, इन शहनाई की गीतों के बीच कोई उन्हीं गलियों में बेवफ़ाई के नगमे भी गाने वाला है, तेरी बेवफ़ाई की सौगात से  कोई जन्नत सजाने वाला है... तेरे मोहब्बत की गलियों में  भटका मैं एक मुसाफ़िर हूँ, तूने अपना धर्म बदल लिया, दुनियाँ की नजरों में मैं अब काफ़िर हूँ, काफ़िर बन कर भी तेरी मोहब्बत के धर्म को कोई निभाने वाला है, तेरी बेवफ़ाई की सौगात से कोई जन्नत सजाने वाला है ... इन्हीं हंसी वादियों में मुस्कुरा कर तूं रुखसत हुई थी, चाँद तारों की गवाही में तेरे इश्क़ के इजहार से मेरी जिंदगी जन्नत हुई थी, पूरी जिंदगी इसी जन्नत में तेरे झूठे  वादों कोई गुनगुनाने वाला है, तेरी बेवफ़ाई की सौगात से कोई जन्नत सजाने वाला है .... हाथों में किसी और के नाम की मेहंदी सजा कर बहुत ख़ुश होगी, तेरे लबों पर ग़लती से सही किसी और का नाम आने वाला है, तेरे हाथों की मेहंदी का रंग भी  कोई नाम भुलाने वाला है, तेरी बेवफ़...

६१. इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है ...@

इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है ... ✍🏻  बिपिन कुमार चौधरी उन्हें रब से भी शिक़ायत है, रब के बंदों से भी शिक़ायत है, अपने कर्मों से कोई गीला शिकवा नहीं, इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है ... जीवन हाथी पर बैठा महावत है, सृष्टि में सबसे सुंदर यह इनायत है, चींटी भी वक्त पर करता बगावत है, अहंकार के मद में ऊंचाई खोता महावत है, इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है ... दूसरों की तरक्की देख मन आहत है, सब कुछ पाकर भी हमें नहीं राहत है, चाहतों के मकड़जाल में फंसा इंसानियत है, ईश्वर को शबरी के जूठे बैर की चाहत है, इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है माना कि जिंदगी में बहुत कमी है, फ़िर भी कब हमारी जिंदगी रुकी है, जिसे हम हासिल कर चुके, दूसरों की सिर्फ चाहत है, इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है ... अपने बच्चों के मनमानी में हम हीं सबसे बडे़ रूकावट हैं, यही वक्त की सबसे गूढ़ नजाकत है, हम जिस रब के बच्चे उनकी भी कुछ चाहत है, इंसान में दोषारोपण की ओछी आदत है ... अपने मन से नहीं कर्मों के हिसाब से मांगो, दूसरों के दोष को तबेला के खूंटी में टांगों, फ़िर चारों ओर स्वर्ग सी यह इनायत है,...

ना जाने क्यों तेरे संग देख मुझे यह दुनियाँ परेशान हो जाता है ...

ना जाने क्यों तेरे संग देख मुझे यह दुनियाँ परेशान हो जाता है ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी तेरे  ख़ूबसूरत लबों पर अक्सर मेरा नाम आता है, यह मेरी खुशनसीबी है , तेरे नाम के साथ मेरा नाम ...

बेवफ़ा

बेवफ़ा ... किताबों में अक्सर जिनकी सूरत दिख जाती है, कानों में जिसके चहकने की आवाज गुनगुनाती है, सपनों में वो अपने गुनाहों का हिसाब मांगती है, वक्त भी जिन यादों को भुला नहीं पाय...