दिया जलाने की आदत है ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी छोटा आदमी हूँ मेरा ओकाद भी छोटा है, अपने ईश्वर पर मुझे पुरा भरोसा है, चाहे क़िस्मत कितना खोटा है, कर्म करता रहता हूँ, फल मीठे कम खट्टे ज्यादा है, हौंसला कई बार टूट जाता है, फ़िर भी कुछ ख़ास करने का इरादा है, आंसू भी आंखो में आ जाता है, मेहनत मेरा फल कोई और पाता है, मायूस मैं कोई इतराता है, किसी का हक़ हड़पना मुझे नहीं आता है, वक्त का पहिया, कब रुका जो अब रुकेगा, क़िस्मत वालों बेशक खुशनसीब हैं, हौंसला कब झुका जो अब झुकेगा .... अतीत गवाह है, साहस कई मर्ज की दवा है, हार कर भी जिसे पूजता जहाँ है, इसलिय कुछलोग हमसे खफ़ा है.. कई अपनों का मन भर गया है, कई गैरों को अपना बना लिया है, कुछ अपनों को आज भी शिक़ायत है, कुछ गैरों को अपना बनाने की मेरी चाहत है ... मैं सिर्फ़ अदना इन्सान हूँ, छल - प्रपंच की दुनियाँ से थोड़ा अनजान हूँ, दोष जहाँ लोग भगवान पर भी थोप देते हैं, शिक़ायत से बच सकूं नहीं मैं ऐसा भगवान हूँ, अंधेरी गलियों से अक्सर गुजर जाता हूँ, लड़खड़ा कर गिरता फ़िर...