*मुक्कमल मुकाम*
✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी*
बेगानों के भीड़ में खोकर, अपनों की तलाश होती है।
तृप्त हो जाए अंतर्मन, बड़ी मुश्किल ऐसी प्यास होती है।।
प्यासा होकर भी अक्सर, मुझे सुखद यह अहसास है।
मेरा दिल धड़कता जिसके लिए,
वो इस जहां में सबसे खास है।।
माना बहुत दूर हूं तुमसे, नसीब में नहीं तेरा साथ है।
मेरी जिंदगी हो जाती है जन्नत, तेरी यादें भी क्या सुखद अहसास है।।
मुस्कुराता हुआ तेरा चेहरा, चांद से भी जिसको जलन है।
खुशनसीबी कृष्ण हूं मैं तेरा, राधा जैसा मेरा भी एक सनम है।।
ख्वाहिशें होती नहीं सब पूरी। कहानियां रह जाती हैं कुछ अधूरी।।
फिर भी किसी के दिल में किसी का नाम होता है।
अमर प्रेम कहानियों का शायद यही मुक्कमल मुकाम होता है।।
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