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१२२. बदनामी @

*बदनामी*

✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी*

दूध बहुत महंगा हो गया  है,
यह शिकायत सरेआम है,
मयखाने में कब, कहां, किसने पूछा,
इतना महंगा क्यों जाम है...

बहुत करते हैं यह लोग मिलावट,
हर दूधवाला यहां बदनाम है,
शराब की बनावट पर क्यों नहीं एतराज़,
कितनों की जिंदगी में लाता यह तूफान है...

स्वर्ग की चाहत सबको यहां पर,
अमृत पीना बहुत कम चाहते है,
खुद के शराबी होने का कारण,
अपने बनाए नरक के गमों को बताते हैं,

घर घर जाकर, आवाज़ लगाकर,
कोई दूध हमें जतन से पहुंचाता है,
मिलावटी कहकर करते हम तिरस्कृत,
मयखाने वाला ज्यादा सम्मान पाता है,

नाम पर करना दंगा फसाद,
काम बहुत यह आसान है,
मां बोलकर उन्मादी बनने वालों,
गो माता की सेवा नहीं आसान है,

समाज में इस काम की कोई कद्र नहीं,
गौ सेवक भूखे मरे, किसी को फर्क नहीं,
भूखा आदमी का कोई ईमान नहीं होता है,
रोटी की मजबूरी में दूध में पानी मिलाता है,

सनातन संस्कृति के ज्ञानी पाखंडियों,
मयखाने बंद होने पर बहुत परेशान हैं,
बिहार में दारू की दूकान क्यों बंद है,
इसलिए भी नीतीश कुमार कुछ बदनाम हैं....

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