*जनता के मन की बात*
✍🏽 *बिपिन कुमार चौधरी*
जिस किसी को भी हमारी जिंदगी से यहां खेद है,
बन गई उसकी जिंदगी, ना जाने कौन सा भेद है,
आज भी अपनी छिद्रों में पैबंद लगाता रहता हूं,
पता नहीं, जिंदगी या सिस्टम किसमें ज्यादा छेद है,
आंसू बहा बहा कर जिसने भर दिया घड़ा,
हक हमारा मारने से दिल उसका नहीं भरा,
अच्छे दिनों की यादों में नींद भी आती नहीं,
राष्ट्रहित में कितना त्याग, हूं सहमा और डरा
हमारा दर्द सुनने को उन्हें वक्त नहीं है,
अपनी सुनाने से उन्हें फुरसत नहीं है,
इसी कश्मकश में हम वक्त काट रहे हैं,
कौन चोर, कौन मोर, वो ज्ञान बांट रहे हैं,
चोरों पर करो कार्रवाई, हम दिल से देंगे वाहवाही,
अगर अब भी हो रहा चूक, बताओ किसकी लापरवाही,
कभी वक्त निकाल, चुनावी भाषण सुन लिया करो,
हम भले कुछ नहीं बोलें,हर बात आपको देगी सुनाई,
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