देशद्रोही
हमें रहने दो खामोश,
सुन नहीं पाओगे, हमें क्या तकलीफ है,
तेरी हुकूमत का बड़ा जलवा है,
सच बोलने पर भी लगाई बंदिश है,
मुबारक हो तुम्हें,
तुम्हारे सपनों का सलतनत,
अपने गुजरे कल से बेशक हम खुश नहीं,
आजकल देशद्रोही बताना भी बड़ा अजीब है...
@ बिपिन कुमार चौधरी
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