उम्मीद ...
समस्याएं कल भी थी, समस्याएं आज भी है,
रास्ते कल भी कठिन थे, आज भी आसां नहीं है,
चुनौतियां कल भी थी, मुश्किलें आज भी कहां कम है,
फिर भी खिलखिला लेता हूं क्योंकि जीवन में उम्मीद है,
उम्मीदों के हवा महल में उड़ने से क्या होगा,
इस कदर यूं बार बार पीछे मुड़ने से क्या होगा,
किसने क्या किया, इस बात पर लड़ने से क्या होगा,
अंतर्कलह में जीवन करके बर्बाद मरने से क्या होगा,
अपनी ऊर्जा करके एकत्र, आओ करें ऐसी हुंकार,
दिखे सिर्फ मछली की आंख, भूल जाएं सारा संसार,
वक्त को कौन रोक पाया, आओ बनाएं इसे यादगार,
कर्म का फुल जब खिलेगा, स्वर्ग बन जायेगा संसार,
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