पाने की ख्वाइश सबको है, यहां बोना कोई चाहता नहीं,
हंसने की ख्वाइश में गदर, आंख भिंगोना कोई चाहता नहीं,
सृष्टि का यह कठोर नियम, बिना दर्द होता नहीं सृजन,
संघर्षपथ से हो जाए जो विचलित, उसके साथ विधाता भी नहीं,
आंखों में दर्द का सैलाब छिपाए, सपने जिन नयनों से ओझल होता नहीं,
विघ्न भी होता उनके कदमों में नतमस्तक, लक्ष्य से वह भटकता नहीं,
पीड़ाएं लाख सह कर भी, जो दिल में सिद्धांतों का गंगाजल रखता है,
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