इंतिज़ार
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
अपनी गलियों से सबको होता प्यार है,
दूसरी गलियों को भी मेरा इंतिजार है,
मेरी खुशनसीबी पुरानी गलियां भी गुलज़ार है,
नई गलियां भी मेरे स्वागत को तैयार हैं ....
कुछ नई चुनौतियों को मेरा इंतिजार है,
दो-दो हाथ करने को मेरा दिल भी तैयार है,
अपने रब पर मुझे भी एतबार है,
नई फिजाओं से गुफ्तगू को यहा बंदा भी बेक़रार है,
इन पुरानी गलियों में मेरा कुछ अजीज यार है,
मेरा हौंसला इन्हीं लोगों से मिलने वाला प्यार है,
तुम्हारे हीं जैसे कुछ नये यारों का इंतिजार है,
नई गली में भी अपने यारों का बनाना मुझे सरकार है....
बेशक हमारे बीच दूरियों की लंबी दीवार है,
जिंदगी की कठिन उलझनों को भी मेरा इंतिज़ार है,
ऐसा नहीं हुअा ऐसा पहली बार है,
हमारे दम से हीं आनेवाला खुशनुमा बहार है ...
नभ के तारीकाओं के बीच भी दूरी अपार है,
अंधकार से लड़ना हीं इनका व्यापार है,
इसीलिये इन तारीकाओं को पूजता संसार है,
हम यारों के बीच भी कुछ ऐसा हीं प्यार है,
हर पल मुझे तुम्हारा औऱ तुम्हें मेरा इंतिज़ार है...
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