जिंदगी है हर पल इम्तिहान,
डर नहीं लगता है,
बिना गुनाहों की सजा पाता रहा हूं,
इसी बात से दिल डरता है...
मुस्कुरा कर गम छिपा लेता हूं,
जबकि अंदर एक ज्वालामुखी जलता है,
अंधेरों से हमारी पुरानी दोस्ती है,
मेरी जिजीविषा से थोड़ा थोड़ा यह भी जलता है...
अस्कों को इसलिए संभाल कर रखा है,
साथ जलने वाले दियों की तपिश कम ना हो जाए,
मेरा हौंसला जिनके उड़ान का कारण है,
उनकी ऊंचाई कम ना हो जाए ...
*दीपावली की शुभकामनाएं*
✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी*
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