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जिनकी खुशियाँ हमसे है, वही आज हमारे लिये पराया है ...

जिनकी खुशियाँ हमसे है, वही आज हमारे लिये पराया है ...

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

जिनके रहमोकरम से हमने यह सतरंगी दुनियाँ पाया है,
रब मैं क्या जानूं रब के बारे में भी जिसने हमें बताया है,
ना जाने किन अपनों के लिये हमने उन्हें रुलाया है,
जिनकी ख़ुशीयां हमसे है, वही आज हमारे लिये पराया है...
किसी ख़ास ने कुछ राज हमें बताया है,
उनकी चाहत में खोट है ऐसा हमें  बताया है,
सिर्फ वही हमारी अपनी, मेरे सहोदर से भी उसका मन भर आया है,
जिनकी खुशियाँ हमसे है, वही आज हमारे लिये पराया है,

नन्हें अंगुलियों को पकड़ चलना जिसने सिखाया है,
रास्ते के कंकड़ों को चुन जीवनपथ सपाट जिसने बनाया है, 
जीवन की अंतिम बेला में उसको हमने बोझ बताया है,
जिनकी खुशियाँ हमसे है, वही आज हमारे लिये पराया है ....

मेरे आंखो में आँसू नहीं आये, इसी धुन में जिन्होंने सारी उम्र पसीना बहाया है,
अपनी छाती का दूध पिला कर जिसने ख़ुद रूखा-सूखा खाया है,
किसी अपने ने उसी से अलग मेरे लिये पकवान पकाया है,
जिनकी खुशियाँ हमसे है, वही आज हमारे लिये पराया है ...

मेरी हसरतों पर न्यौछावर कर जिसने जिंदगी गंवाया है,
प्यार के दो मीठे बोल को उनका कान तरस आया है,
मेरे थाली के पकवानों को देख किसी का आँख डबडबाया है,
जिनकी खुशियाँ हमसे है, वही आज हमारे लिये पराया है ...

मेरे अंदर के मृत इंसानियत ने तांडव बहुत मचाया है,
इन पकवानों का मैंने किन्हीं के चरणों में भोग लगाया है,
उनकी हाथों से पहला नेवाला मैंने ख़ुद खाया है,
जिनकी खुशियाँ हमसे है, उसके बिन सब पराया है  ...

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