ना जाने क्यों तेरे संग देख मुझे यह दुनियाँ परेशान हो जाता है ...
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
तेरे ख़ूबसूरत लबों पर अक्सर मेरा नाम आता है,
यह मेरी खुशनसीबी है , तेरे नाम के साथ मेरा नाम सरेआम आता है ...
तेरी चाहत का ये नशा है, तेरे बिन अब मुझे भी चैन नहीं आता है ...
ना जाने क्यों, तेरे संग मुझे देख यह दुनियाँ परेशान हो जाता है,
आजकल मुझे ख़ुद की भी ख़बर नहीं रहती है,
अक्सर तेरी यादों में सुबह से शाम हो जाता है,
मेरी नजर जहाँ भी जाये, तेरा हीं चेहरा नजर आता है,
ना जाने क्यों तेरे संग मुझे देख यह दुनियाँ परेशान हो जाता है...
तेरा साथ पा कर मेरा रब भी मुझ पर मेहरबान हो जाता है,
तेरे बग़ैर यह खुशनुमा मौसम भी मेरे दिल को रास नहीं आता है,
तेरे बिना मुझे जिंदगी में कुछ भी नजर नहीं आता है,
ना जाने क्यों तेरे संग मुझे देख यह दुनियाँ परेशान हो जाता है...
तन्हाई में भी तेरी सुरीली आवाज मेरे कानों में गुनगुनाता है,
तेरे बिना कोयल की कूक भी मेरे दिल को नहीं भाता है,
तुझे खो नहीं दूँ, यही ग़म मुझे दिन-रात तड़पाता है,
ना जाने क्यों तेरे संग देख मुझे यह दुनियाँ परेशान हो जाता है...
रास्ते कठिन हैं, फ़िर भी मुझे आसान नजर आता है,
तेरे साथ से हर रास्ता मुझे मुमकिन नजर आता है,
तेरे चेहरे के मुस्कान से मेरा जिंदगी संवर जाता है,
ना जाने क्यों तेरे संग देख मुझे यह दुनियाँ परेशान हो जाता है ...
तेरी हर आहट का पैगाम यह हवा लेकर आता है,
जमाने के सितम को तेरे चेहरे की मुस्कुराहट छिपाता है,
तेरी इसी सादगी पर मेरा दिलोजान कुर्बान हो जाता है,
ना जाने क्यों तेरे संग देख मुझे यह दुनियाँ परेशान हो जाता है ...
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