मुसाफ़िर ढूंढ़ते हैं तो किनारा मिल हीं जाता है,
मुसीबत हो चाहे कितनी बड़ी, रब का इशारा मिल हीं जाता है ...
कृपा अगर उनकी हो, बीच मझधार से भी आदमी निकल जाता है,
इशारे समझना जो नहीं चाहते, किनारे पर भी वह डूब जाता है ...
Copyright @ बिपिन चौधरी
मुसाफ़िर ढूंढ़ते हैं तो किनारा मिल हीं जाता है,
मुसीबत हो चाहे कितनी बड़ी, रब का इशारा मिल हीं जाता है ...
कृपा अगर उनकी हो, बीच मझधार से भी आदमी निकल जाता है,
इशारे समझना जो नहीं चाहते, किनारे पर भी वह डूब जाता है ...
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