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५१. समाधान @

शब्दों के बहुत मायने होते हैं,
सवांद अदायगी रिश्तों के आईने होते हैं,
बातें संसद औऱ अदालत में भी बहुत होती है,
आधा कुतर्क आधे स्वार्थ-सिद्धि के अफ़साने होते हैं ....

हक़ीक़त अत्यंत क्रूर होता है,
इन्सान कब हमेशा मजबूर होता है,
वक्त को करवट बदलने की आदत है,
चुनौतियों से मुंह मोड़ने वालों को मिलती नहीं राहत है,
अफ़साने की दुनियाँ में जब कोई मगरूर होता है,
अपने जीवन की कश्ती किनारे पर डुबोता है,

वक्त के हाथों कौन यहाँ लाचार नहीं होता है,
कर्म से बड़ा कोई उपचार नहीं होता है,
सरलता से हर समस्या का समाधान नहीं होता है,
सुखकी तलाश में अक्सर सुख हीं कुर्बान होता है,
हमेशा भगवान की दहलीज पर सर पटकना समाधान नहीं होता हैं,

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