जाहिल
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
महफ़िल में तीन लोग थे,
मैं, मेरी ख़ुशी औऱ मेरी जिंदगी,
जिंदगी को झुक कर आदाब क्या किया,
ख़ुशी बिल्कुल रूठ गयी है,
ग़म को जबसे अपनी जिंदगी बनाया है,
बहुतों से दोस्ताना टूट गयी है,
इन टूटे दोस्ताने से मैं फ़िर भी बेख़बर हूँ,
सच्चे दोस्तों से रू ब रू हुई मेरी जिंदगी है ...
भीड़ में थोड़ा तन्हा जरूर हूँ,
फ़िर भी सुकून महसूस होता है,
ख़ुशी अपने साथ भीड़ लेकर आयी थी,
ग़म ने उनका तासीर बताया है,
ख़ुद को बहुत होशियार समझता था,
मेरे जिंदगी ने मुझे कितना जाहिल बताया है...


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