*कुछ लोग पैदा लेते हीं पार्टी के भगवान हो गये हैं ...*
कुछ गदहे पहलवान हो गये हैं,
पतलून पहनते हीं जवान हो गये हैं,
बालों को सफ़ेद करवाने वाले आश्रित इनके हैं,
कुछ लोग पैदा लेते हीं पार्टी के भगवान हो गये हैं...
अनुभव की बारीकियां जिन्होंने सीखी नहीं है,
जनता की मजबुरीयाँ जिन्हें दिखी नहीं है,
सत्ता की कुर्सी के कदरदान हो गये हैं,
कुछ लोग पैदा लेते हीं पार्टी के भगवान हो गये हैं...
पराजय की तोहमत कार्यकर्ताओं पर मढ़ देते हैं,
जमीनी हक़ीक़त से अलग कहानी गढ़ देते हैं,
पुरखों को बैज्जत करा सुलेमान हो गये हैं,
पैदा लेते हीं पार्टी के भगवान हो गये हैं ...
लोकतंत्र की आबरू को तवायफ़ समझ लूटना चाहते हो,
तुष्टीकरण की नीति को धर्मनिरपेक्षता बताते हो,
आतंकियो के खिदमतगार के लिये भयभीत मुसलमान हो गये हैं,
कुछ लोग पैदा लेते हीं पार्टी के भगवान हो गये हैं
तरक्की की बात कर क्या ख़ूब देश को लूटा है,
जनता समझती है तेरा हर वादा झूठा है,
वर्षों जिन्होंने किया शाषन, पांच वर्षों में हीं परेशान हो गये हैं,
कुछ लोग पैदा लेते हीं पार्टी के भगवान हो गये हैं ...
चापलूसों की नौटंकी हमें नहीं दिखाओ,
अगर जनता के शुभचिंतक हो बुनियादी बातों को उठाओ,
लोकतंत्र के मालिक इसलिए मोदीजी पर मेहरबान हो गये हैं,
कुछ लोग पैदा लेते हीं पार्टी के भगवान हो गये हैं ...
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