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शिक्षक बंधु को यूं मूर्ख नहीं बनाओ ...

शिक्षक बंधु को यूं मूर्ख नहीं बनाओ ...

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

संघ-संघ का गीत हम सबने बहुत गाया,
सत्ता और स्याह कोट ने इसी का फायदा उठाया ...
सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई को किसी ने नहीं,
सभी संघों के मठाधीशों के अभिमान ने हराया ...

हमें मतलब नहीं,
किसने क्या खाया क्या पचाया,
अपनी नाक लंबी रखने के चक्कर में,
शिक्षक समाज के नाक को कटवाया ...

हाई कोर्ट के न्याय पर जब अंगुली उठाया,
ये लोग किसी लालच में एक मंच पर नहीं आया,
हमने हरबार नादानी को सिर पर उठाया,
इसी नादानी ने हमें मूर्ख बनाया ...

बैनर ढोने में हमने बहुत समय है गवाया,
क्रांति के शंखनाद का अब समय है आया,
शिक्षक एकता आज है समय का बुलावा,
करे कोई किसी संघ का महिमामंडन,  है यह छलावा...

मांग एक संघ अनेक,
भेद इसका हमें समझाओ,
पद-प्रतिष्ठा के लोभ में,
शिक्षक बंधु को यूं मूर्ख नहीं बनाओ ....

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