जहरीला शब्द
मुझे रहने दो गुमनाम,
अपनी काल्पनिक दुनियां में,
यहां सुकून है,
समझ है,
फ़ुरसत है,
इत्मीनान है,
भावनाओं की कद्र है,
खुद के होने का फख्र है,
तेरी वास्तविक दुनियां में,
कुछ भी वास्तविक नहीं,
षड्यंत्र है,
प्रपंच है,
लालच का नंगा नाच है,
जिंदगी बदहवाश है,
घुटन है,
सिसकियां और सिहरन है,
खामोशियों में बहुत कुछ दफ़न है,
भींगी पलकों के बीच,
खून से लथपथ कफन है,
क्या सोच रहे,
बहुत कड़वा बोलता हूं,
निर्लज्जों को भरवा बोलता हूं,
बेशक दूरियां बढ़ा लो,
आगे हो सकता है,
तुम्हें मेरी जरूरत नहीं,
गिरगिट की तरह रंग बदल लूं,
ऐसी हमारी फितरत नहीं...
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