*संघर्ष पथ*
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✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी*
आजकल के लोग भी कितने अजीब हैं,
पैसों से अमीर, दिल से बिल्कुल गरीब हैं,
दिमाग इनका शैतानी लेकिन बनते शरीफ हैं,
पीठ पीछे शिकायत, मुंह पर करते तारीफ हैं,
ईर्ष्या द्वेष का दिल में भंडार है,
दुखी इसलिए, खुश क्यों संसार है,
अपनी करनी का इन्हें कोई गम नहीं,
बदलना इनको लेकिन पुरा संसार है,
इनकी हर समस्या का दोषी कोई और है,
इनका दिल जानता है, वह खुद कामचोर है,
समस्याओं का सामना करने में इन्हें शर्म आता है,
लोग हैं कितने खराब, यह दुनियां को बतलाता है,
दूसरों की जिंदगी में ताक झांक इनकी आदत है,
बनते ज्ञानी जबकि ऐसी जिंदगी पर लानत है,
बातों से अक्सर यह जहर बहुत उगलते हैं,
उसी जहर की नरक में तिल तिल जलते हैं,
अपेक्षाएं बहुत लेकिन करना कुछ नहीं है,
इतना बोझ लेकर क्या जीना, मरना यहीं है,
दिल में जो है ख्वाइश, नित्य उसके लिए कर्म करो,
हर हमेशा अंगुली उठाने वाले, थोड़ा तो शर्म करो...
समस्या कोई नहीं ऐसा, जिनका समाधान नहीं,
राम ने भी समंदर पर पुल बनाया , आया काम हनुमान नहीं,
अपनी बनावटी सुरक्षा कवच से निकल कर जंग लड़ो,
या मुंह बंद रखकर, कीड़े मकोड़ों की तरह बेमौत मरो...
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