हमदर्द
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दुश्मन बनाने का मुझे शौक नहीं,
कोई इसी काबिल है,
तो मैं क्या करूं,
मेरे जनाजे को कंधा देने वाले,
बेशक मेरे अपने होंगे,
मेरा जनाजा उठने की चाहत रखने वाले,
तुझे मैं कैसे अपना कहूं,
आंखो का आंसू,
हमेशा सच नहीं होता है,
किसी की मुस्कुराहटों की खातिर,
अपनी आंखो का आंसू छिपाने वाले,
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