इंकलाब जिंदाबाद...
संप्रभुता का आया गंभीर संकट,
उचित नहीं राजनीतिक नाटक,
मां भारती कर रही पुकार,
विश्वासघाती चीनियों का हो संहार,
नेपाल सिर्फ एक मोहरा है,
षड्यंत्र बहुत ही गहरा है,
बेशक सीमा पर वीर जवानों का पहरा है,
देश के अंदर कुछ चेहरों पर कई चेहरा है,
बासठ का ज़ख्म हमें भूलना नहीं चाहिए,
वाजपेईजी के जिम्मेदार विपक्ष का अनुकरण करना चाहिए,
राजनीतिक प्रतिद्वंदिता चलती रहेगी,
हमारी एकता और राष्ट्र की अखंडता अक्षुण्ण रहना चाहिए,
देश के कोने कोने से आ रही एक आवाज,
बता दो दुश्मनों को उसकी औकाद,
हर धर्म से ऊपर हमारा राष्ट्रवाद,
आओ सब मिलकर बोलें, इंकलाब जिंदाबाद...
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