पूज्यनीय
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
सुना-सुना लगती है यह जिंदगी,
अनसुना जब रह जाये कोई विनती,
सुनना हीं हमेशा समाधान नहीं होता है,
सुन कर भी मनुष्य मनुष्यता खोता है...
सुमिन्त्रा को सुन कर आयोध्या रोया था,
दुनियां की सुन कर राम ने सीता खोया था,
राज पाठ लूट गया जब हरिश्चंद्र सोया था,
कहना मुश्किल किसने क्या काटा क्या बोया था ??
अक्सर परीक्षा अच्छे लोगों की होती है यहाँ,
अद्भुत प्रेम फ़िर भी श्याम से महरूम हुई राधा,
कर्ण दानवीर था, इसलिय ईश्वर ने हीं उसे छला,
स्त्री दाव पर लगी, युधिष्ठर से सवाल किसने किया ? ? ?
भीष्म ने अपनों के लिये सिंहासन त्याग दिया,
उन्हीं अपनों ने संपूर्ण शरीर को बाणों से सजा दिया ...
जीतने वालों की गलतियों को कौन पूछता है,
पूज्यनीय वही यहीं यहाँ अंत में जो जीतता है ...
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