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संदेश

३८. जनक्रांति @

जय जन क्रांति जय जन क्रांति, जय जन क्रांति जय जन क्रांति आओ मिलकर भरें ऐसी हूंकार, स्वस्थ बने समाज, शिक्षा का हो प्रसार, चारों ओर हो शांति ही शांति ... जय जन क्रांति जय जन क्रांति... जनता के सेवक से जनता सताए जा रहे हैं, लोकतंत्र के मालिक आंसू बहाए जा रहे हैं, आओ मिलकर दूर करें भ्रष्टाचारियों की भ्रांति, जय जन क्रांति जय जन क्रांति लाचारों के आंखों का आंसू जब पोछेंगे हम, पूरा होगा स्वामी विवेकानंद वाले भारत का स्वप्न, आयेगी हमारे देश में अमन चैन और शांति, जय जन क्रांति, जय जन क्रांति माना हमारा डगर थोड़ा कठिन है, अपनी चट्टानी एकता पर हमें भी यकीन है, हमारी चाहत सबकी तरक्की, सबकी उन्नति ... जय जन क्रांति जय जन क्रांति सेवा का जुनून जलाए रखना है, संघर्षपथ पर नित्य आगे बढ़ते रहना है, तभी मिलेगी चंद्रशेखर सुभाष भगत के आत्मा को शांति, जय जन क्रांति, जय जन क्रांति आओ बंधु हाथों से हाथ जोड़ लें, राष्ट्र हित में अपने सारे मतभेद छोड़ दें, हमारे प्रयास से भारतवर्ष में आयेगी क्रांति, जय जन क्रांति जय जन क्रांति...

सत्ता मद में मतवाला है

सत्ता मद में मतवाला है ... बहा के आंसू घड़ियाली, कैसे आयेगी हरियाली, यहां नियत कार्बन से काला है, क्या सत्ता मद में मतवाला है... हाथों से हाथ जोड़ा था, गिनीज़ बुक में रिकॉर्ड तोड़ा था, गरीबों ने छोड़ा शराब , अमीर आज भी भोला है, क्या सत्ता मद में मतवाला है... योजनाएं फ़ैल होती है, जनता किस्मत पर रोती है, काग़ज़ी घोड़ों का हर ओर बोलबाला है, क्या सत्ता मद में मतवाला है... अरमानों का गला घूंटा यहां, लाचारों का आबरू लूटा यहां, समाजसेवा ऐसा गड़बड़ झाला है, क्या सत्ता मद में मतवाला है, मेधा परेशान बिना अवसर, मजबूरियों में निराश हताश होकर, चौराहे पर लगा भुज्जा पकोड़ा का ठेला है, क्या सत्ता मद में मतवाला है.. सुनहरे सपने दिखा दिखा कर, जनता के पैसों को लूट माड़कर, हो रहा नित्य नया घोटाला है, क्या सत्ता मद में मतवाला है... बदलाव की उम्मीद में, आंखें हमारी पथरा गई है, कौन सुने जनता की चीख, सबके कानों पर जड़ा ताला है, क्या सत्ता मद में मतवाला है... ✍🏻 *विपिन वियान हिंदुस्तानी*

३९. कर्तव्य पथ (The love that hurts) @

कर्तव्य पथ ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी     (Happy New year 2020) आज फिर एक वर्ष बदल रहा है, बेशक हालात भी बदलेंगे, चुनौतियां भी बदलेगी, परिस्थितियां भी बदलेगा, ना बदलेगा सूरज, ना ही चांद बदलेगा, निज स्वार्थ में पतित, ना कोई इंसान बदलेगा, मानवता के पुजारियों का, नहीं कोई सिद्धांत बदलेगा, अपने ही बनाए उलझनों में उलझ कर, फिर हर इंसान बदलेगा, गर्त में खुद को गिड़ाकर, सम्मान खोजते हैं, अहंकार में जिसे खो दिया, अब वही पुराना सुकून ढूंढ़ते हैं, वक्त ने कई जख्मों को भरा है, यह भी भर जाएगा, कलुषित भावनाओं से बाहर आकर, हमें अपना कर्तव्य पथ दिखेगा...

४१. संघर्ष @

संघर्ष ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी झूठ की बुनियाद पर, इंसान चतुर बन सकता है, सत्य का पथरीला डगर पर, जीवन मधुर बन सकता है, मुंह पर जवाब नहीं पाकर, खुद को हम शेर समझते हैं, मजबूरियों से दबे इंसानों को, बलि का सुलभ भेड़ समझते हैं, परेशानियों से मुक्ति का एक ही रास्ता, परिणाम से बेफिक्र कर्म से वास्ता, लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में कोई अवरोध नहीं, अपने कर्तव्यों के निर्वहन से जिन्हें कोई क्षोभ नहीं... वक्त जब- जब अंगड़ाई लेती है, चतुराई का पहाड़ मिनटों में ढहती है, पाप के घड़े का फूटना तय है, संघर्षशील की दुनिया करती जय है...

४२. अपनों की उड़ान @

जिंदगी है हर पल इम्तिहान, डर नहीं लगता है, बिना गुनाहों की सजा पाता रहा हूं, इसी बात से दिल डरता है... मुस्कुरा कर गम छिपा लेता हूं, जबकि अंदर एक ज्वालामुखी जलता है, अंधेरों से हमारी पुरानी दोस्ती है, मेरी जिजीविषा से थोड़ा थोड़ा यह भी जलता है... अस्कों को इसलिए संभाल कर रखा है, साथ जलने वाले दियों की तपिश कम ना हो जाए, मेरा हौंसला जिनके उड़ान का कारण है, उनकी ऊंचाई कम ना हो जाए ... *दीपावली की शुभकामनाएं* ✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी*

११७. यादों की कुर्बानी *

यादों की कुर्बानी ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी कर रहा था दिवाली की सफाई, ना जाने क्यों आंखे डबडबाई, यादों के झरोखों से कोई घूर रहा है, महफली से भली लगती है तन्हाई... दिल तुम्हारा कुछ ज्यादा ही साफ़ है, इसलिए कई लोग तुम्हारे ख़िलाफ़ है, अपनी मन की करके बहुत खुश हो, या मेरे से बेहतर की तुम्हें तलाश है... तेरी यादों से सुंदर किसका साथ है, मेरे दिल ने भी उससे पूछ लिया, आंखे छिपाकर क्यों फफक रही हो, क्या खुद के जख्मों पर नमक छिड़क रही हो, कल भी तुम बहुत अकेले थे, आज भी तुम उतने ही तन्हा हो, नमक छिड़क भी खुश हो जाऊंगी, अफसोस तुम तन्हा, मैं दूर जिंदा हूं... आख़िर क्या चाहती हो तुम ? दुनियां से रुखसत हो जाऊं, अपने क़िस्मत को कितना मैं कोसूं, क्या छिपा है तुमसे जो बताऊं... अपनी जिद्द में सबकुछ खोया है, दुनिया छोड़  कर क्या तुम पाओगे, सारे घर की सफाई तो कर ली तूने, अपनी यादों से मुझे कब मिटाओगे...

४३. जिंदगी का बोझ @

जिंदगी का बोझ ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी माना कंधे पर थोड़ा कम वजन है, बचपन की ख्वाहिशें भी दफन है, खुश हूं क्योंकि बदन से दूर कफन है, छोटी उम्र लेकिन हौसला मेरा बुलंद है... मेरी उम्र के बच्चे अक्सर रो लेते हैं, निश्चिंत होकर बेफिक्र सो लेते हैं, मैं सिर्फ क़िस्मत को गालियां दे लेता हूं, अपने पसीने से पेट की आग बुझा लेता हूं... मेरा बोझ देख दया बहुतों को आती है, कामचोर शराबी बाप को मां बहुत समझाती है, मेरे कमाए पैसों को यहां वहां छिपाती है, यही पीड़ा मेरे होंसले को बहुत रुलाती है ... मैं धीरे - धीरे रोना भी भूल गया हूं, वक्त के जालिम झूलों पर झुल गया हूं, कष्ट पहुंचा कर मैं भी अब खुश हो लेता हूं, दुनिया ने जो मुझे दिया वही उसे देता हूं ... मुझे किसी से मदद की उम्मीद नहीं है, मेरे जैसा हौसले का कोई अमीर नहीं है, मुझ पर दुनिया वाले बिल्कुल दया नहीं दिखाना, वक्त ने सिखा दिया है मुझे जिंदगी का बोझ उठाना...