सत्ता मद में मतवाला है ...
बहा के आंसू घड़ियाली,
कैसे आयेगी हरियाली,
यहां नियत कार्बन से काला है,
क्या सत्ता मद में मतवाला है...
हाथों से हाथ जोड़ा था,
गिनीज़ बुक में रिकॉर्ड तोड़ा था,
गरीबों ने छोड़ा शराब , अमीर आज भी भोला है,
क्या सत्ता मद में मतवाला है...
योजनाएं फ़ैल होती है,
जनता किस्मत पर रोती है,
काग़ज़ी घोड़ों का हर ओर बोलबाला है,
क्या सत्ता मद में मतवाला है...
अरमानों का गला घूंटा यहां,
लाचारों का आबरू लूटा यहां,
समाजसेवा ऐसा गड़बड़ झाला है,
क्या सत्ता मद में मतवाला है,
मेधा परेशान बिना अवसर,
मजबूरियों में निराश हताश होकर,
चौराहे पर लगा भुज्जा पकोड़ा का ठेला है,
क्या सत्ता मद में मतवाला है..
सुनहरे सपने दिखा दिखा कर,
जनता के पैसों को लूट माड़कर,
हो रहा नित्य नया घोटाला है,
क्या सत्ता मद में मतवाला है...
बदलाव की उम्मीद में,
आंखें हमारी पथरा गई है,
कौन सुने जनता की चीख,
सबके कानों पर जड़ा ताला है,
क्या सत्ता मद में मतवाला है...
✍🏻 *विपिन वियान हिंदुस्तानी*
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें