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संदेश

३९. कर्तव्य पथ (The love that hurts) @

कर्तव्य पथ ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी     (Happy New year 2020) आज फिर एक वर्ष बदल रहा है, बेशक हालात भी बदलेंगे, चुनौतियां भी बदलेगी, परिस्थितियां भी बदलेगा, ना बदलेगा सूरज, ना ही चांद बदलेगा, निज स्वार्थ में पतित, ना कोई इंसान बदलेगा, मानवता के पुजारियों का, नहीं कोई सिद्धांत बदलेगा, अपने ही बनाए उलझनों में उलझ कर, फिर हर इंसान बदलेगा, गर्त में खुद को गिड़ाकर, सम्मान खोजते हैं, अहंकार में जिसे खो दिया, अब वही पुराना सुकून ढूंढ़ते हैं, वक्त ने कई जख्मों को भरा है, यह भी भर जाएगा, कलुषित भावनाओं से बाहर आकर, हमें अपना कर्तव्य पथ दिखेगा...

४१. संघर्ष @

संघर्ष ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी झूठ की बुनियाद पर, इंसान चतुर बन सकता है, सत्य का पथरीला डगर पर, जीवन मधुर बन सकता है, मुंह पर जवाब नहीं पाकर, खुद को हम शेर समझते हैं, मजबूरियों से दबे इंसानों को, बलि का सुलभ भेड़ समझते हैं, परेशानियों से मुक्ति का एक ही रास्ता, परिणाम से बेफिक्र कर्म से वास्ता, लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में कोई अवरोध नहीं, अपने कर्तव्यों के निर्वहन से जिन्हें कोई क्षोभ नहीं... वक्त जब- जब अंगड़ाई लेती है, चतुराई का पहाड़ मिनटों में ढहती है, पाप के घड़े का फूटना तय है, संघर्षशील की दुनिया करती जय है...

४२. अपनों की उड़ान @

जिंदगी है हर पल इम्तिहान, डर नहीं लगता है, बिना गुनाहों की सजा पाता रहा हूं, इसी बात से दिल डरता है... मुस्कुरा कर गम छिपा लेता हूं, जबकि अंदर एक ज्वालामुखी जलता है, अंधेरों से हमारी पुरानी दोस्ती है, मेरी जिजीविषा से थोड़ा थोड़ा यह भी जलता है... अस्कों को इसलिए संभाल कर रखा है, साथ जलने वाले दियों की तपिश कम ना हो जाए, मेरा हौंसला जिनके उड़ान का कारण है, उनकी ऊंचाई कम ना हो जाए ... *दीपावली की शुभकामनाएं* ✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी*

११७. यादों की कुर्बानी *

यादों की कुर्बानी ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी कर रहा था दिवाली की सफाई, ना जाने क्यों आंखे डबडबाई, यादों के झरोखों से कोई घूर रहा है, महफली से भली लगती है तन्हाई... दिल तुम्हारा कुछ ज्यादा ही साफ़ है, इसलिए कई लोग तुम्हारे ख़िलाफ़ है, अपनी मन की करके बहुत खुश हो, या मेरे से बेहतर की तुम्हें तलाश है... तेरी यादों से सुंदर किसका साथ है, मेरे दिल ने भी उससे पूछ लिया, आंखे छिपाकर क्यों फफक रही हो, क्या खुद के जख्मों पर नमक छिड़क रही हो, कल भी तुम बहुत अकेले थे, आज भी तुम उतने ही तन्हा हो, नमक छिड़क भी खुश हो जाऊंगी, अफसोस तुम तन्हा, मैं दूर जिंदा हूं... आख़िर क्या चाहती हो तुम ? दुनियां से रुखसत हो जाऊं, अपने क़िस्मत को कितना मैं कोसूं, क्या छिपा है तुमसे जो बताऊं... अपनी जिद्द में सबकुछ खोया है, दुनिया छोड़  कर क्या तुम पाओगे, सारे घर की सफाई तो कर ली तूने, अपनी यादों से मुझे कब मिटाओगे...

४३. जिंदगी का बोझ @

जिंदगी का बोझ ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी माना कंधे पर थोड़ा कम वजन है, बचपन की ख्वाहिशें भी दफन है, खुश हूं क्योंकि बदन से दूर कफन है, छोटी उम्र लेकिन हौसला मेरा बुलंद है... मेरी उम्र के बच्चे अक्सर रो लेते हैं, निश्चिंत होकर बेफिक्र सो लेते हैं, मैं सिर्फ क़िस्मत को गालियां दे लेता हूं, अपने पसीने से पेट की आग बुझा लेता हूं... मेरा बोझ देख दया बहुतों को आती है, कामचोर शराबी बाप को मां बहुत समझाती है, मेरे कमाए पैसों को यहां वहां छिपाती है, यही पीड़ा मेरे होंसले को बहुत रुलाती है ... मैं धीरे - धीरे रोना भी भूल गया हूं, वक्त के जालिम झूलों पर झुल गया हूं, कष्ट पहुंचा कर मैं भी अब खुश हो लेता हूं, दुनिया ने जो मुझे दिया वही उसे देता हूं ... मुझे किसी से मदद की उम्मीद नहीं है, मेरे जैसा हौसले का कोई अमीर नहीं है, मुझ पर दुनिया वाले बिल्कुल दया नहीं दिखाना, वक्त ने सिखा दिया है मुझे जिंदगी का बोझ उठाना...

४४. सफलता का बहाना @

सफलता का बहाना ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी लोगों के तानों से तंग इन्हीं तानों से तना, बुनता रहा मैं जिंदगी का ताना बाना, नहीं मेरी परेशानियां खत्म हुई और नहीं ताना, हकीकत मेरे हिस्से आई और जमाने का हो गया अफसाना ... इन तानों के चटकारे में हकीकत बना अफसाना, सबको पहचान कर भी बनना पड़ा मुझे अनजाना, मेरा हौंसला देख फ़िर भी हैरत में है ज़माना, तेरी इसी हैरानी को देख खुश है यह संघर्ष का दीवाना... सलाम तेरे हुनर को सलामत रहे तेरा ताना, जख्मों पर नमक छिड़कने में अव्वल तुं हो जाना, ऊपर वाले मुझ पर सिर्फ इतनी रहमत तुम फरमाना, कठिन हालातों में भी विचलित न कर सके मुझे कोई ताना... मेरी मजबूरियों का मज़ाक सोच समझकर बनाना, कोई मजबूर ऐसा नहीं जिसे ताना मारती नहीं ज़माना, इन ताने मारने वालों के बस में नहीं कोई जिंदगी सजाना, और हम जैसे पागल बनाते हैं इसे सफलता का बहाना,

१००. राधा का प्रेम @

राधा का प्रेम ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी जिंदगी की जद्दोजहद, परेशानियों का सिलसिला, जब रास्ते कम हो बाधाएं ज्यादा, ऐसे में प्रेरणा बनती है राधा... कोई भटक जाता है, कोई मझधार से नैय्या खेता है, किसी की जिंदगी बन जाती है, किसी के आंखों में जीवन भर आंसू रहता है.... हम उन्हें पूजते हैं, जो कृष्ण की राधा थी, जिसका प्रेम अद्भुत अनुपम था, कृष्ण के कर्म पथ में कब वह बाधा थी... हर किसी को यहां बहुत गिला-शिकवा है, उनका प्रेम पवित्र हमारा रासलीला है, प्रेम की पवित्रता को जो समझ नहीं पाया, कर्मपथ से होकर विचलित जीवन को गंवाया... राजा बन कर भी कृष्ण के दिल में अजीब खालीपन था, त्याग समर्पण से भरा राधा का प्रेम पावन था, उच्छृंखलता दिखाकर अपना स्वाभिमान खोया नहीं था, काया की दूरी दिलों का मिलन ऐसा अद्भुत प्रेम उन्होंने किया था....