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४४. सफलता का बहाना @

सफलता का बहाना

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

लोगों के तानों से तंग इन्हीं तानों से तना,
बुनता रहा मैं जिंदगी का ताना बाना,
नहीं मेरी परेशानियां खत्म हुई और नहीं ताना,
हकीकत मेरे हिस्से आई और जमाने का हो गया अफसाना ...

इन तानों के चटकारे में हकीकत बना अफसाना,
सबको पहचान कर भी बनना पड़ा मुझे अनजाना,
मेरा हौंसला देख फ़िर भी हैरत में है ज़माना,
तेरी इसी हैरानी को देख खुश है यह संघर्ष का दीवाना...

सलाम तेरे हुनर को सलामत रहे तेरा ताना,
जख्मों पर नमक छिड़कने में अव्वल तुं हो जाना,
ऊपर वाले मुझ पर सिर्फ इतनी रहमत तुम फरमाना,
कठिन हालातों में भी विचलित न कर सके मुझे कोई ताना...

मेरी मजबूरियों का मज़ाक सोच समझकर बनाना,
कोई मजबूर ऐसा नहीं जिसे ताना मारती नहीं ज़माना,
इन ताने मारने वालों के बस में नहीं कोई जिंदगी सजाना,
और हम जैसे पागल बनाते हैं इसे सफलता का बहाना,

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